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इस्लाम में फातिमा ज़हरा(स0अ0) के मक़ाम को पहचानना,दीन की वास्तविक ज्ञान की शर्त है

22:24 - April 30, 2012
समाचार आईडी: 2315507
ज्ञान और विचार समूह: मोहम्मद रज़ा फलसफी ने कहा: कि हज़रत पैगंबर के इस मशहूर फरमान फातिमा(स0अ0)मेरा टुक्ङा है की तरफ तवज्जोह करने से यह बात साफ हो जाती है कि सिद्दीक़ए कुबरा(स0अ0) का मक़ाम और स्थिति के बिना दीन इस्लाम अधूरा है और इसका मक़सद भी पूरा नहीं है
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी(IQNA) शाखा इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हज़रत फातिमाज़हरा(स0अ0)की शहादत की सालगिरह के मौक़े पर कई इस्लामी संस्थाओं के सहयोग से सियरा लियोन में स्थित ईरानी सांस्कृतिक केन्द्र के कल्चरल सेंटर में"जागृति और हज़रत फातिमाज़हरा(स0अ0)के विषय पर एक बैठक आयोजित की गई
इस बैठक की शुरूआत हज़रत फातिमाज़हरा(स0अ0)की ज़ियारत से हुई इसके बाद ईरानी कौंसलर मोहम्मद रज़ा ने भाषण के दौरान हज़रत फातिमा ज़हरा (स0अ0)की शख़्सियत को पैगंबर मुहम्मद(PBUH) की ज़हमतों का हासिल और पूरे इतिहास में महिलाओं के लिए एक नमूनए अमल क़रार देते हुए कहा है कि सिद्दीक़ए कुबरा(स0अ0) का मक़ाम और स्थिति के बिना दीन इस्लाम अधूरा है और इसका मक़सद भी पूरा नहीं है
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