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बहरीन में मानवाधिकार की बर्बादी के लिए पश्चिमी संस्थानों में आपसी सद्भावः

8:32 - May 09, 2012
समाचार आईडी: 2321751
अंतरराष्ट्रीय समूह: पिछले एक साल में क्षेत्र में जारी क्रांतिकारी आंदोलनों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानवाधिकार के संगठनों ने मध्य पूर्व की बिगड़ती हुए स्थिति पर गहरी नजर जमा रखी है, लेकिन गहरी नज़रें हमेशा राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन और हितों के साथ पूरी तरह से जुड़ी रही हैं यानी मानवाधिकार के संगठनों की ऐसी मुनाफ़िक़ाना नीति जिस को बहरीन में जारी मानव संकट के बारे में विशेष रूप से महसूस किया जा सकता है.
इन देशों के बीच जहां इस्लामी जागरूकता ने महलों में भूकंप बरपा किया और सरकारों को उलट कर रख दिया है बहरीन के हालात सबसे अधिक जटिल है, और यह गंभीर स्थिति और घटनाऐं भी सब के लिए अयां हैं. अक्सर नागरिक इस बात पर विश्वास करते हैं कि जब भी अल्पसंख्यक सरकार को अपने हाथों से ताकत निकलती हुई दिखाई देती है जनता के साथ निष्पक्ष व्यवहार के बजाय अत्याचार और हिंसा के हरबे अपनाए जाते हैं लेकिन यहां अल्पसंख्यक पर स्थापित सरकार ने बहुमत को कुछ अधिकार और विशेषताऐं पेश किए हैं, लेकिन यह विशेषताऐं जनता के ग़म और गुस्से को ठंडा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
यहां जिस चीज़ का वर्णन करना चाहिए वह यह कि बिना शक बहरीन में विरोध प्रदर्शन बरपा करने वाली बहुमत शियों की है और सरकार सदन में सत्ता सुन्नी अल्पसंख्यकों के पास है किन्तु यह बात बहरीन में जारी संकट और सार्वजनिक प्रदर्शनों से बिल्कुल अलग है क्योंकि अरब देशों की अक्सर सरकारें बहुमत पर सरकार कर रहें हैं इसलिए बहरीन में सुन्नी शिया मुश्किल का ज़िक्र करना आसान है लेकिन अगर इस समस्या को वास्तविक्ता की दृष्टि से देखा जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि बहरीन में कोई धार्मिक या राष्ट्रीय मतभेद नहीं बल्कि इस देश की सबसे बड़ी मुश्किल सार्वजनिक अधिकार का हनन होना है.
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