जबकि जॉर्डनियों का मानना है कि वित्तीय सहायता देश की बीमार अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित नुसख़ा नहीं हो सकता है.
"स्वतंत्रता सुधारों के बिना संभव नहीं है." देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यह ऐक ब्रिटेन में जॉर्डनी कवि की कविता की पंति थी.
जार्डननी जनता ने विरोध प्रदर्शन में जो जॉर्डन की आजादी की सालगिरह अवसर पर आयोजित हुआ नारों के साथ देश में व्यापक सुधारों की मांग की.
आर्थिक विश्लेषकों और इस्लामवादियों का कहना है कि गणित पैकेज बहुत खतरनाक है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा देने की संभावना है.
जॉर्डन वह पहला देश था जिसने सह्यूनी शासन के वजूद को स्वीकार किया और हमेशा अपने ऐजेंडे में पश्चिम के साथ सहयोगी नीति को क़रार दिया और इसी कारण क्षेत्र मे इस्लामी जागरुक्ता से बहुत भयभीत है.
जॉर्डन में वर्ष 2011 इस्लामी जागरुक्ता की शुरूआत से ही जनता द्वारा सत्ता रूण शासन के ख़िलाफ़सड़कों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित होरहे हैं मेरी नज़र में अगर इस देश की सरकार वित्तीय समस्याओं और समाजी मुद्दों को हल करने पर ध्यान न देसकी तो शाह अब्दुल्ला द्वितीय के पास सालेह व मुबारक जैसे अन्य राजनीतिक धर्मान्तरित से जुड़ने के अलावादूसरा कोई विकल्प नहीं बचेगा.
रज़ा अदालती पुर
1017589