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इमाम के स्वभाव ने राष्ट्रीय गरिमा को देश के शरीर में फूंक दिया / कुरआनी तर्क में गरिमा की अवधारणाः

10:07 - June 04, 2012
समाचार आईडी: 2339839
राजनीतिक समूहःक्रांति के सर्वोच्च नेता ने इमाम मर्हूम को आज मुस्लिम विश्व में इस्लामी आंदोलनों के पिता के रूप में बताया और कहाः इमाम खुमैनी के प्रकृति व शिष्टाचार में मुख्य बात देश के शरीर में राष्ट्रीय गौरव की आत्मा को फूंकना और राष्ट्र जीवित करना है.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने सर्वोच्च नेता के कार्यालय की वेबसाइट के हवाले से नक़्ल किया है, अयातुल्ला Khamenei इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने इस्लामी गणराज्य के संस्थापक के मज़ार पर इमाम खुमैनी के आशिक़ों व दीवानों की ऐक बड़ी भीड़ में इमाम मर्हूम को राष्ट्र का पिता और दया, इक़्तेदार और शक्ति का प्रतीक बताया और राष्ट्रीय गौरव की आत्मा को जीवित करने तथा मिल्लत की आंतरिक संरचना को मज़बूत करने में इमाम के सचेत प्रयासों की ओर इशारा करते हुऐ कहाः इतिहासकार ईरानी राष्ट्र, इन्ही कारकों पर निर्भर होते हुऐ सभी राष्ट्रों के सामने इस्लामी ईरान को सफल मॉडल और दुनिया के विकासशील देशों के प्रभाव-क्षेत्र से बाहर प्रगतिशील के रूप मे पेश किया और दुनिया के उत्पीड़कों को भयभीत कर दिया है और यही रौशन रास्ता प्रगति की चूटियों पर पहुंने तथा दुश्मनों के निश्चित निराशा तक जारी रहेगी और निस्संदेह, मुस्लिम देशों और ईरान के लिए भविष्य, अतीत की तुलना में बेहतर होगा.
इस समारोह में जो कल सुबह इस्लामी क्रांति के महान नेता के निधन 23वीं वर्षगांठ पर महान भव्यता के साथ आयोजित किया गया था अयातुल्ला Khamenei ने उम्मत के पिता हज़रत अमीरूलमोमनीन अली अ.के जन्म की धन्य ईद व 13 रजब को पिता दिवस के रूप में नामित करने की ओर इशारा करते हुऐ बल दिया: हमारे महान इमाम ने इस मिल्लत के हक़ में पिता जैसा काम किया इस लिऐ कि ऐक ओर आप बाप जैसी दया और मोहब्बत का प्रतीक और दूसरी ओर क़ूव्वत और शक्ति का प्रतीक थे.

उन्होंने इसी तरह इमाम मर्हूम को आज मुस्लिम विश्व में इस्लामी आंदोलनों के पिता के रूप में बताया और कहाः इमाम खुमैनी के प्रकृति व शिष्टाचार में मुख्य बात देश के शरीर में राष्ट्रीय गौरव की आत्मा को फूंकना और राष्ट्र जीवित करना है.
इस्लामी क्रांति के नेता ने इमाम खुमैनी (र.) इस गरिमा का स्पष्ट उदाहरण बताया और उल्लेख किया, इमाम खुमैनी अपने जीवन के दौरान चाहे विज्ञान और शिक्षण के क्षेत्र में, चाहे कठिन जिहाद के समय और चाहे प्रबंधन और हाकिमीयत के दौरान हो दयालु व अज़ीज़ ख़ुदा पर तवक्कुल करते थे.
अयातुल्ला Khamenei ने कहा कि इसी कारण जो काम सभी की नज़र में अ संभव थे इमाम के आने से संभव हो गऐ और सभी बांध जो अभेद्य और ना टूटने वाले थे इमाम की मौजूदगी ने तोड़ दिया.
अयातुल्ला Khamenei ने इस ज़मीन के उतार चढ़ाव इतिहास की ओर इशारा करते हुऐ कहाः कि हम ईरानि लोग अपने लंबे इतिहास में विभिन्न अवधियों, गरिमा और अपमान के गवाह हैं कि क्रांति के अग्रणी दो सौ साल बहुत मुश्किल, अंधेर और अपमानजनक थे.
इन्हों ने क्षेत्र और दुनिया में अलग थलग होजाने, आर्थिक क्षेत्र में पिछड़ेपन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गढे मे गिर जाने और भ्रष्ट सरकारों व ईरानी शासकों द्वारा उपनिवेशवादियों और विदेशियों से प्रभावित होने को क़ाचार और पहलवी के दौरान अपमान की निशानियों में गिनवाया.
इस्लामी क्रांति के नेता ने तुर्कमानचाय व गुलिस्तान जैसे अपमानित समझौतों व ईरान के दसयों शहरों के ईरान से अलग होजाने की ओर इशारा करते हुऐ कहाः उस अपमानजनक समय
विदेशी ताक़तों ने पहलवी शासन को जनम दिया और ईरान को राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उजाड़ कर रख दिया.
अयातुल्ला Khamenei, ने महान इस्लामी क्रांति को ईरानी राष्ट्र के अपमान के दिनों की समाप्ति और गरिमा की प्रक्रिया की शुरूआत बताते हुऐ बल दियाः कि क्रांति की सफलता से पन्ना पलट गया और इमाम खुमैनी ने राष्ट्रीय गौरव की आत्मा को जीवित करने के साथ "हम कर सकते हैं"की संस्कृति को इस मोमिन क़ौम की रूह में डाल दिया.

अयातुल्ला Khamenei, ने ईरानी राष्ट्र और इस्लामी गणतंत्र को अनुभव और प्रगति और राष्ट्रीय महिमा का सफल मॉडल बताया और विवरण में इन वास्तविक प्रगतियों के संकेतकों और उदाहरणों, में कहा: ईरानी राष्ट्र ने अपने 33 साल में सभी राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और सुरक्षा की चुनौतियों का सामना किया जो इस्लामी शासन को हटाने के उद्देश्य से, परियोजित और लागू, की गयीं थी और उन पर कंट्रोल कर लिया है और यह वास्तववक्ता ईरानी महान राष्ट्र की प्रगति के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में है
अयातुल्ला Khamenei ने इसी चर्चा में, देश की वैज्ञानिक प्रगति को अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों में बताया कि दुनिया के सरकारी केन्द्रों का स्वीकारना ईरान की उल्लेखनीय प्रगति को बता रहा है.

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक केन्द्रों के अनुसार ईरान में वैज्ञानिक विकास, पिछले साल दुनिया के औसत से 11 बराबर था, जबकि परमाणु, नैनो, स्टेम सेल, एयरोस्पेस और पर्यावरण प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में, ईरान एक शानदार स्थिति में है और तरक़्क़ीयाफ़्ता देशों में शुमार होता है.
अयातुल्ला Khamenei ने जोर दिया कि जो बात अहंकार शक्तियों के स्थंभो में भूकंप पैदा कर दिया है, यह तथ्य है कि ईरानी राष्ट्र ने साबित कर दिया है कि अमेरिका व दावा करने वाली शक्तियों पर निर्भर हुऐ बिना बल्कि उनके मुक़ाब्ले में प्रगति हासिल की जा सकती है .
अयातुल्ला Khamenei ने युवाओं, छात्रों, अधिकारियों, विद्वानों, और समुदाय को प्रभावित करने वाले लोगों को संबोधित करते हुऐ बल दिया कि प्रगति की चोटियों खासकर राजनीति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नैतिकता और आध्यात्मिकता को प्राप्ति करने की दिशा में बिना रुकावट के बढ़ते रहें और इस पथ में, हम अपने दोषों को दूर करें.
उन्होंने कहा कि प्रगति की शिखर चोटियों की ओर लगातार बढ़ते रहना दुश्मन की बाधाओं जैसे प्रतिबंधों को बेअसर कर देगा.
इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्ला Khamenei ने कहा प्रतिबंध, ईरान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकते लेकिन केवल उनका प्रभाव पश्चिम के देशों से मिल्लत की गहरी घृणा हो सकता है.

अयातुल्ला Khamenei ने कहा कि ईरान अब आगे की ओर बढ़ रहा है और जिस शिखर पर पहुंच जाऐगा, दुश्मनी और संघर्ष भी खत्म हो जाएगा.
अयातुल्ला Khamenei ने मिस्र को महान देश व बहुत क़दीमी क़ौम तथा क्षेत्र में प्रभावशाली बताया और कहाः बुरे व भ्रष्ट शासकों ने सालों मिस्री क़ौम को अपमानित किया और यहूदी शासन के लिऐ स्ट्राटेजिक ख़ज़ाने में बदल दिया था लेकिन अब यह ख़ज़ाना ग़ासिब यहूदियों के हाथों से निकल चुका है.
इस्लामी क्रांति के नेता कहाःबहरीन में लोगों की मांगो का उत्तर दिया जाना चाहिऐ तो इसके बजाय कोशिश की जारही है कि इस बहस, शिया और सुन्नी के बीच धार्मिक मतभेद में बदल दें और लोगों के अधिकारों को छिपा दें.
अयातुल्ला Khamenei, ने कहाः अल्लाह के करम से क्षेत्र में हर प्रयास परिणाम रहित हो जाऐगा लेकिन सावधान रहें कि, जातीय, धार्मिक, और सांप्रदायिक आग न लगने पाऐ.
इन्हों ने अंत में बल दियाः निसंदेह मुस्लिम देशों और ईरान के लिए भविष्य, अतीत की तुलना में बेहतर होगा.
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