राजनीतिक और सामाजिक समूह:इमाम खुमैनी (र.) के निधन के अवसर पर सेमिनार «अली (अ.), मौलूदे ख़ानऐ ख़ुदा और ख़ुमैनी परमेश्वर के धर्म का फिर से जिलाने वाला" 300 से अधिक विद्वान, छात्रों, विचारकों, और seminarians की उपस्थित में आयोजित किया गया.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) इस्लामी संस्कृति और संबंध संगठन की शाखा के अनुसार, यह बैठक मस्जिदे जामे इमाम ज़मान(aj) के सांस्कृतिक केंद्र द्वारा इसी मस्जिद के सम्मेलन हॉल में काबुल शहर के दश्त Barchi क्षेत्र में आयोजित हुई शुरुआत में Abdolali Amini काबुल शहर के हौज़ऐ इल्मियह के टीचर ऐक सही हदीस की ओर इशारा करते अमीरुल मोमनीन की साहसी हस्ती पर रोशनी डाली और कहा ख़ुमैनी बुत शिकन ने भी इस कारण कि हज़रत की पाक नस्ल से थे वर्तमान समय में अपने जद की तरह बहादुर,मोमिन और जागरूक मनुष्य थे, और दुनिया की राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने आगे कहा कि यह Alavi मकतब था कि इमाम खुमैनी जैसे सक्षम व्यक्तित्व को पैदा किया कि दोस्त और दुश्मन सब उनके आंदोलन से उंगली मुँह में दबाऐ है.
इस बैठक में नासिर Jahanshahi, काबुल में ईरानी सांस्कृतिक विमर्श ने अपने भाषण में इमाम खुमैनी को इस्लामी उम्मतों बल्कि मानवता में एक संबंध का बिंदु बताया और कहा: यदि इमाम खुमैनी (र.) और उनका आंदोलन ना होता,तो इतिहास और इस्लामी दुनिया जो कुछ आज देख रही है न देखती,हिम्मत के साथ कह सकते हैं कि जो गरिमा व गर्व व महानता इस्लाम तथा मुसल्मानों की आज है इस इतिहासिक शख़्स के आंदोलन की देन है.
jahanshahi ने शुद्ध इस्लाम मोहम्मदी (PBUH)के विकास में इमाम अली की सोच और विचारों की ओर इशारा करते हुऐ कहाःकि लोगों की खुशी Mola अली (स), के अनुसार सोच और चलने में है जो हमारे दौर में ख़ुमैनी की राह में देखी जासकती है इमाम ख़ुमैनी ने यह साबित किया जो क़ौम शहादत रखती है असारत नहीं रखती.
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