अंतरराष्ट्रीय समूह: गंभीर दबाव में रहने वाली लीबिया की जनता के लिए इस्लामी जागरूकता का पहला उपहार स्वाधीनता और गद्दाफी की सुरक्षा बलों के भय और डर के बिना चुनाव का आयोजन है. राष्ट्रीय चुनावों में जनता की भागीदारी ऐक ऐतिहासिक परिवर्तन गिना जाता है, पेट्रोलियम भंडार पर आधारित इस ज़ुरख़ेज़ धरती का भविष्य राजनीतिक प्रणाली और भविष्य, संसद प्रतिनिधियों और विधानसभा सदस्यों के चुनाव के कृतज्ञ है जो लीबिया के बुन्यादी कानून को निश्चित करेंगे.
लीबिया में लगभग आधी सदी के बाद पहले चुनाव 18 दिन की देरी के साथ हाल में शुरू होने जा रहे हैं कि चुनाव आयोग ने सुरक्षा मुद्दों और लाजिस्टिक षड्यंत्रों को चुनाव में विलंब का कारण बताया है.
इससे पहले लीबिया के संसदीय चुनाव 19 जून को आयोजित होना थे लेकिन अब 7 जुलाई को चुनाव की अंतिम तारीख़ निश्चित की गई है. इस बात की भी उम्मीद की जाती है कि चुनाव में विलंब शायद डिफ़ॉल्ट योजना के तहत की गई हो लेकिन चुनाव आयोग के अध्यक्ष "नूरी अलाबारी" यह समझते हैं कि उक्त आयोग के पास चुनाव में विलंब का कोई कार्यक्रम नहीं था लेकिन देश ऐसे दौर से गुज़र रहा है जिस की शर्तों का विचार करना हमारी मजबूरी है.
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