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दुश्मन जान ले कि ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध घमंड और बेजा उम्मीदें कहीं नहीं पहुंचा सकतीं

4:57 - June 19, 2012
समाचार आईडी: 2349358
राजनीतिक समूह: क्रांति के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला Khamenei ने शासन के दुश्मनों पर ज़ोर दियाःईरानी मुजाहिद और धैर्य रखने वाली मिल्लत के मुक़ाब्ले विफल प्रयोगों से सबक़ लें और जान लें कि घमंड, अपने बड़े को बड़ा आंकना और बेजा उम्मीदें ऐसी क़ौम के सामने जिसने प्रतिरोध और एकता को कुरान से सीखा और अपने को पहचाना है कहीं नहीं लेजा सकती हैं.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) सुप्रीम नेता के कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार, अयातुल्ला Khamenei, इस्लामी क्रांति के सुप्रीम नेता ने कल सुबह (सोमवार) को महान पैगंबर की बेषत की सालगिरह पर शासन के अधिकारियों, राजदूतों और इस्लामी देशों के प्रतिनिधियों और शहीदों के परिवारों के ऐक समूह से मुलाक़ात में बल दियाःनूरे बेषत के अनगिनत संबंधे के बीच आज मानव समाज को दो बातों की तत्काल जरूरत रखता है ऐक " सोच और फ़िक्र को उत्साहित करना" और दूसरे " तहज़ीबे इख़्लाक़"
इस्लामी क्रांति के नेता ने महान पैगंबर की बेषत की सालगिरह पर ईरान और इस्लाम की प्रिय मिल्लतों को बधाई देते हुऐ कहा मुसल्मान क़ौमो को मोहम्मद (PBUH) के धर्म की ओर ख़ुशी से आना इस बात का संकेत है कि मुसलसल अनुभवों से इस परिणाम तक पहुंच गई हैं कि पूर्वी और पश्चिमी भौतिकवाद विचार मानव की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में अस्मर्थ व बांझ हैं केवल बेषत की शिक्षाऐं ही मानव को सच्चे समृद्धि और प्रगति की ओर ले जा सकती हैं.
अयातुल्ला Khamenei, ने मानव समाज की समस्याओं की जड़ बेषत के दो मौलिक मुद्दों से दूरी को बताया यानि "सोच व फ़िक्र" और "स्वयं को पवित्र करना" है और कहा: मानव समाज की समस्याओं और नैतिक कम्ज़ोरियों से नजात देना ही बेषत का महान उद्देश्य है जिसका वजूद क़ौमों की समस्याओं को हल कर सकता है.
अयातुल्ला Khamenei, ने प्रभु के वादे को साकार करने के लिए मुजाहिदत और मूव्मेंट,खतरों को स्वीर करना ज़रूरी है और क़ुरानी आयतों का हवाला देते हुए कहा, केवल मोमिन होना वादे को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है बल्कि संघर्ष और प्रतीक्षा चाहता है.
उन्होंने शासन के दुश्मनों पर ज़ोर दियाःईरानी मुजाहिद और धैर्य रखने वाली मिल्लत के मुक़ाब्ले विफल प्रयोगों से सबक़ लें और जान लें कि घमंड, अपने बड़े को बड़ा आंकना और बेजा उम्मीदें ऐसी क़ौम के सामने जिसने प्रतिरोध और एकता को कुरान से सीखा और अपने को पहचाना है कहीं नहीं लेजा सकती हैं..
अयातुल्ला Khamenei ने भाषण के अंत में, मुस्लिम उम्मतों को ज्ञान, एकजुटता और प्रतिरोध की सिफारिश की और आशा व्यक्त की कि भगवान की रहमतों की छाया में इस्लामी उम्मत अपने दुश्मनों पर विजयी हो और बेषत के के उद्देश्यों को प्राप्त करे.

बैठक में राष्ट्रपति, संसद के अध्यक्ष, न्यायपालिका प्रमुख,तश्ख़ीसे मस्लेहते निज़ाम बोर्ड के प्रमुख भी उपस्थित थे श्री अहमदीनेजाद ने पैगंबर स.की बेषत की बधाई देते हुऐ कहा आज हर दौर से अधिक इलाही शिक्षाओं और पैगंबर मुहम्मद की बेषते के संदेशों की आवश्यकता है.
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