ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) की रिपोर्ट के अनुसार तुर्की के इस्लामी शोधकर्ता और लेखक "रदवान काया" अपने भाषण के शुरू में कहा हम मुसलमानों को दुनिया के सभी क्षेत्रों में विभिन्न नई तकनीक से सामना होता है और इससे प्रभावित होते हैं और हमेशा अपने जीवन में परीक्षा और परीक्षण की स्थिति में रहते हैं.
उन्होंने कहा यह बदलाव हमेशा द्विपक्षीय नहीं होती बल्कि कुछ अच्छाई से बुराई की ओर और कुछ इस के उल्टा हैं, मुसलमानों की जीवन में परिवर्तन, वही परिवर्तन है जिसे कुरआन निर्देश, खैर व बरकत के नाम से याद करता है, यानी सभी मनुष्य अंधकार से प्रकाश की ओर और अशिक्षा से ज्ञान की ओर हरकत करते हैं, और इसके विरोध से भी कुरआन में मना किया है, इसलिए हम मुसलमानों का कर्तव्य है कि अपने जीवन में कमाल और सुशबखती तक पहुँचने के लिए ख़ुदा वंदे मुतआल की किताब की इताअत करें.
उन्होंने अंत में कहा हमें चाहिए कि हम कुरआन को अपना रहबर और नेता मानें और उसके मुताबिक़ अमल करें, हमें यह समझना चाहिए कि ख़ुदा वंदे मुतआल हमेशा हमारा समर्थक और नासिर है, इसलिए हमें लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निराश नहीं होना चाहिए, और इस्लामी समाज बनाने के लिए अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर से ग़ाफ़िल नहीं होना चाहिए, और साथ अपने लक्ष्य पाने के लिए गठबंधन और ऐकता को भी कभी नहीं भूलाना चाहिए.
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