अंतरराष्ट्रीय समूह: संविधान सभा चुनाव की पूर्व संधिया पर लीबिया संक्रमणकालीन राष्ट्रीय परिषद ने 5 जुलाई को, एक बार फिर देश के संविधान में ऐक स्रोत के रूप में इस्लामी शरीयत से लाभ लेने की आवश्यकता पर बल दिया.
ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) वेबसाइट «mediaterranee» के अनुसार,लीबिया संक्रमणकालीन नेशनल असेंबली के एक प्रवक्ता ने परसों एक संवाददाता सम्मेलन में बताते हुए कि इस देश के लोग अपनी इस्लामी पहचान से हाथ नहीं उठा सकते, कहाः संविधान सामग्री समझाने में इस्लामी Shari'ah को स्रोत बनाने पर वोटिंग नहीं कराई जाएगी. लीबिया के लोग मुसलमान हैं और उनका संविधान भी इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित होना चाहिऐ.
उन्होंने कहा, कि इस संबंध में लीबिया संक्रमणकालीन राष्ट्रीय परिषद, आगामी संविधान सभा के सदस्यों से आग्रह करती है कि इस्लामी शरीयत को लीबिया संविधान के स्रोत के रूप में उपयोग किया जाऐ.
इससे पहले मुस्तफा अब्दुल जलील, लीबिया संक्रमणकालीन राष्ट्रीय असेंबली के अध्यक्ष ने भी घोषणा की थी कि Qaddafi के बाद लीबिया में कानून का मुख्य स्रोत इस्लामी शरीयत होगा.
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