आप (अ) की नज़र में अगर मुसलमान कुरआन व सुन्नत से संपर्क करें तो उनके बीच मतभेद कम से कम हो सकते हैं.
हौज़ ए इल्मिया नजफ़ अशरफ़ में दरसे ख़ारिज के फ़िक़्ह व उसूल के उस्ताद आयतुल्लाह सैयद फ़ाज़िल मोसवी अलजाबरी ने ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के साथ बातचीत करते हुए मुसलमानों के बीच मतभेद और इख़्तेलाफ़ के महत्वपूर्ण कारकों की व्याख्या करते हुए कहा: इमाम सादिक़ (अ) की हदीसों से हमें पता चलता है कि आप (अ) क़ुरआन और सुन्नत नबवी (स.) से दूरी को मुसलमानों के बीच मतभेद का वास्तविक कारक समझते थे.
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