ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने इस्लामी धर्मों को निकट लाने की विश्व विधानसभा के जनसंपर्क क्षेत्र के हवाले से नक़्ल करते हुए कहा है कि आयतुल्लाह अराकी ने इस्लामी अध्ययन केन्द्र के प्रमुख प्रोफेसर अब्दुल्ला सईद के साथ बातचीत में कहा: हम ऑस्ट्रेलिया की इस्लामी संस्थानों और अन्य क़ौमों के सहयोग से कि जो इस्लामी लक्ष्यों में हमारे साथ एक हैं, बशरीयत की सआदत और अदालत की स्थापना में संघर्ष कर सकते हैं और इस गठबंधन की बरकत से मानव समाज से अन्याय, हत्या और लूट पाट और आतंकवाद की समस्या का समाधान कर सकते हैं.
जनरल विधानसभा के सचिव ने कहाःआपस में धार्मिक हस्तियों और क़ौमों से परिचित होने का कार्यक्रम और धार्मिक व सामाजिक संयुक्त गतिविधियों को अंजाम देना धर्मों व मज़हबों को निकट लाने में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है.
बैठक में प्रोफेसर अब्दुल्ला सईद, इस्लामिक अध्ययन केंद्र, मेलबोर्न विश्वविद्यालय के प्रमुख ने इस बैठक पर खुशी व्यक्त करते हुऐ, इस देश में मुस्लिम समुदाय को युवा और बहुत सक्रिय समुदाय बताया,जो कि देश के विकास में बहुत बड़ी भूमिका रखता है.
उन्हों ने विशेष रूप से 19 वीं सदी में ऑस्ट्रेलिया में मुसलमानों की भूमिका, की ओर इशारा करते हुऐ कहा, ज्यादातर मुस्लिम मुहाजिरत तुर्की, लेबनान और बाक़ी क़ौमें अन्य देशों से बीसवीं सदी (1960) में आई हैं.
प्रोफेसर अब्दुल्लाह सईद ने कहा: हमारे देश ने भी, पिछले 50 वर्षों के दौरान, स्कूलों और अस्पतालों और मुसलमानों के लिऐ मस्जिदों के निर्माण जैसी बहुत सी सेवाऐं की हैं और वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण व मुख्य गतिविधि विभिन्न जातीय समूहों और क़ौमों के बीच एकता और सहयोग पैदा करना है ताकि उन लोगों के बीच अधिक सहानुभूति व निकटता पैदा हो.
उन्हों ने अंत में इस्लामी धर्मों को निकट लाने की विश्व विधानसभा के साथ इस्लामी केन्द्रों के अधिक संपर्क की अपील की.
इस बैठक में मार्क ऐंस ब्राउन तेहरान में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत भी थे.
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