ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA), अब्दुल्लाह अशअल ने 13 सितंबर को अल आलम न्यूज नेटवर्क के साथ बात चीत में इस मतलब के बयान करने के साथ कहाःइस्लाम के दुश्मन क़यामत तक इस्लाम और कुरान के अपमान से हाथ नहीं उठाऐंगे, यहां तक कि पोप ने भी पैगंबर अकरम(PBUH) का अपमान किया है.
मिस्र के पूर्व उप-विदेश मंत्री ने कहाः पवित्र पैगंबर (PBUH) के अपमान पर आधारित फिल्म का Mossad और अल-कायदा द्वारा उत्पादन और प्रसारण किया गया है यह फिल्म जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका में बनाई गई है अंतिम ल्रयास नहीं है बल्कि इस फिल्म को वास्तव में सह्यूनियों के मुसलमानों और ईसाइयों के बीच मतभेद डालने के प्रयास का ऐक हिस्सा कहा सकता है.
अब्दुल्लाह अशअल ने जोर दिया: धर्मों का सम्मान, मानव अधिकारों का हिस्सा है क्योंकि धर्म क्योंकि धर्म मानव आध्यात्मिकता का हिस्सा है स्वतंत्रता का अर्थ दूसरों के विश्वासों पर हमला और उसका अपमान नहीं है।
इस्लाम का अपमान मुसलमानों की जागृति के साथ साथ
इसी संबंध में, जमाल Nasar, मिस्री शोधकर्ता और राजनीतिक विशेषज्ञ ने इस अभिव्यक्ति के साथ कि नबी अकरम (अ.)पर अपमानजनक फिल्म का समय ऐक उद्देश के तहत चयन किया गया है बल दिया: मुसलमानों की जागृति और अरबी क्रांतियों के बाद इस्लामी मुक़द्दसात के अपमान में वृद्धि हुई है.
मिस्र में वैकल्पिक नीतियों और रणनीति एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मिस्र युवाओं से दूतावासों, सार्वजनिक स्थानों व संपत्ति के विनाश पर हमला करने और अन्य धर्मों का अपमान करने से बचने के अनुरोध के साथ कहाः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने से स्वर्गीय धर्मों का अपमान नहीं होना चाहिए क्योंकि यह बात क़ौमों के बीच साज़िश और झगड़े का कारण होगी.
मिस्री विद्वान ने इस ओर इशारा करते हुऐ कि मौरिस सादिक़ फिल्म का ऐक अदाकार इस्लाम के साथ सख़्त दुश्मनी में मश्हूर है,कहाः यहां तक कि विदेश में Coptic निवासी भी उस से नफ़रत करते हैं और मिस्री सरकार ने पहले ही उसकी नागरिकता को रद्द कर दिया है.
Nasar ने जोर दिया: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ धर्म और पवित्र हस्तियों जैसे पैगम्बर मोहम्मद (PBUH) का अपमान करना नहीं है.
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