ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) सर्वोच्च नेता के कार्यालय की जानकारी डेटाबेस के अनुसार,हज़रत इमाम Khamenei, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने सोमवार 24 सितंबर को दोपहर से पहले हज कार्यकर्ताओं के साथ मुलाक़ात में इस्लाम के महान पैगम्बर (स.) की शान में की गई गुस्ताख़ी की ओर इशारा करते हुए कहा है कि आपकी महानता आपके चाहने वालों यहाँ तक कि आपके दुश्मनों पर भी स्पष्ट हो गई है. आपने कहा कि इस साल का हज विशेष परिस्थितियों में अंजाम पाएगा और पिछले वर्षों से अलग है.
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने दया, सम्मान और करामत के पवित्र पैग़म्बर की शान में, अपमान को आप से साम्राज्यवादी मोर्चे की गहरी दुश्मनी और कीने की निशानी बताया. आपने कहा कि घिनौने अपमान भरे कदम के सामने पश्चिमी अधिकारियों ने जो दृष्टिकोण अपनाया है वह दुश्मनी से किसी भी तरह अलग नहीं है.
आपने कहा कि रसूल अल्लाह अकरम (स.) की शान में अपमान और इस से संबंधित साम्राज्यवादी देशों के अधिकारियों के दृष्टकोंण से उनका वास्तविक चेहरा और हक़ और बातिल की जंग का प्राथमिक कारण स्पष्ट हो जाता है और यह भी स्पष्ट हो जाता है कि साम्राज्य की दुश्मनी दरअसल इस्लाम धर्म और रसूल अल्लाह अकरम (स.) की ज़ात गिरामी से है.
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने रसूल अल्लाह अकरम (स.) की पवित्र ज़ात को सभी मुसलमानों और उनके धर्म और फ़रक़ों के जमा होने का केंद्र बताया है. आपने कहा कि इस मुद्दे में शिया, सुन्नी, साधारण और अतिवादी का कोई अर्थ नहीं है और सब दिल और जान से रसूल अल्लाह अकरम (स.) की रक्षा के लिए निकल आए हैं क्योंकि आपकी ज़ात पवित्र, इलाही विश्वास और इस्लाम की धुरी और केंद्रीय है.
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने हज के मौके पर रसूल अल्लाह अकरम (स.) के व्यक्तित्व के आसपास मुसलमानों की एकता के जारी रहने पर बल दिया और उसे बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक बताया आपने कहा कि मशरकीन से ब्राअत के अर्थ यह है कि सारे मुसलमान यह एहसास करें कि वह एक दुश्मन के सामने खड़े हुऐ हैं और अपने दिल व जान से उससे बेज़ारी व्यक्त करते हैं.
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने मुसलमानों को अपनी इस मौजूदा महान ऐकजूट आंदोलन में मतभेद डालने की दुश्मन की साजिशों से सावधान करते हुए मुसलमानों की होश्यारी पर बल दिया. आप ने कहा कि दुश्मनों और साम्राज्य को समझ लेना चाहिए कि उम्मते इस्लामी धार्मिक मतभेद और कुछ सोच और अक़ीदती मुद्दों में मतभेद के बावजूद उनके सामने डटी हुई है.
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