अंतर्राष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) उपग्रह नेटवर्क अल आलम की जानकारी डेटाबेस के अनुसार, शेख अब्दुल बासित अब्दुल माजिद सूडान विद्वान ने कल तेहरान में विश्व शिखर सम्मेलन उलेमाऐ उम्मत और इस्लामी जागृति के दूसरे दिन, कहा: प्रतिरोध विरासत, मूल्यों और धर्म के संरक्षण और अस्तित्व का सबब है और फिलिस्तीन और लेबनान में मुसलमानों की गरिमा और सम्मान को फिर से हासिल कर सकता है.
शेख अब्दुल बासित अब्दुल माजिद ने कहाःहम मुसल्मानों का जहां कहीं भी हैं कर्तव्य है अपने पूरे उपकरण व उपायों के साथ प्रतिरोध का समर्थन करें और आज अगर फिलिस्तीन और लेबनान में प्रतिरोध का अस्तित्व है तो कल अन्य मुस्लिम देशों में ज़रूर पैदा होगा.
इस सूडानी आलिम ने बयान किया: हम मुस्लिम मौलवियों के रूप में एक प्रतिरोध पीढ़ी को पालें और उत्पीड़न और नाजाएज़ क़ब्ज़ों के खिलाफ प्रतिरोध के साथ खड़े होजाऐं और इसके सभी मक़्बूज़ा इस्लामी भूमि को मुफ्त करालें.
शेख अब्दुल बासित अब्दुल माजिद ने अंत में कहाःविश्व के कोने कोने में जहां कहीं मुसल्मान हैं उन पर और इसी तरह धार्मिक उलमा पर वाजिब है कि प्रतिरोध के नारे लगाऐ और मिल्लतों को प्रतिरोध के मूल्यों पर प्रशिक्षण दें क्योंकि प्रतिरोध ख़ुदा व रसूल की सुन्नत है.
नोट्स, उलमाऐ उम्मत और इस्लामी जागृति विश्व शिखर सम्मेलन 29 अप्रेल सोमवार से इस्लामी जागृति के विश्व विधानसभा के स्थायी सचिवालय की ओर से मुस्लिम दुनिया भर से बुद्धिजीवियों, विद्वानों, विचारकों, वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं और विद्वानों की उपस्थित के साथ तेहरान में शुरू हुआ, कल अपराह्न समापन समारोह के आयोजन के साथ हमारे देश के राष्ट्रपति की उपस्थित के साथ समाप्त हो गया.
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