अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) अल-आलम न्यूज नेटवर्क के हवाले से, अमोस Haryyl, Haaretz अखबार के सैन्य विशेषज्ञ ने इजरायली सुरक्षा सूत्रों के हवाले से इस दावे को पेश करते हुऐ कहा:कि यह शासन 2006 में एक बहुत चालाक बम से हसन नसरल्लाह के ठिकाने का निशाना बनाया था!
उनके अनुसार, यह आपरेशन बहुत जटिल लेकिन इस शासन की खुफिया सेवाओं की एकत्र जानकारी के सही न होने के कारण विफल रहा!
2006 के युद्ध की कहानी
2006 के युद्ध के बारे में इस इजरायली सैन्य विशेषज्ञ का नया दावा इस हालत में सामने आया कि क़ाबिज़ शासन को इस युद्ध में प्रतिरोध के ज़रये भारी हार का सामना करना पड़ा था।
लेबनान में प्रतिरोध के खिलाफ 2006 में इजरायल और अमेरिका का युद्ध जो जुलाई युद्ध और द्वितीय लेबनान युद्ध के रूप में जाना जाता है 12 जुलाई, 2006 से शुरू हुआ (1385 तिर 22 फारसी तारीख) जिसने मक़्बूज़ह उत्तर क्षेत्र से लेकर लेबनान भर को अपने चपेट में ले लेया था 14 अगस्त, 2006 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 1701 के तहत (24 मुरदाद 1385) को समाप्त किया गया था।
इन हमलों में इजरायली वायु सेना ने 15 हजार बार लेबनान के तट में विभिन्न क्षेत्रों पर बमबारी की, तथा इजरायली जल सेना ने भी व्यापक परिचालन व्यवस्था में लेबनान के साहिली क्षेत्रों को फंदा कसने के उद्देश्य से अथक गोलाबारी की और इजरायली जमीनी बलों कम से कम 160 हजार राउंड, 2500 मोर्टार गोले लेबनान में बरसाऐ थे।
हालांकि इन हमलों के परिणामस्वरूप कि जिस में अवैध हथियार जैसे क्लस्टर फास्फोरस बम का उपयोग हुआ था 1,200 लेबनानी नागरिक मारे गए और हजारों घायल और बेघर हुऐ थे, लेकिन यहूदी शासन के इन हमलों का कोई मूल्य और सैन्य उपलब्धि नहीं मिला।
इस युद्ध में पहली बार इसराइल के मरने वाले सैन्य की संख्या विपक्ष से अधिक थी और लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन के शहीद 74 सदस्यों की थी जब कि सामने 117 सैनिक और वरिष्ठ इजरायली अधिकारी मारे गए थे।