अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने «vetogate» जानकारी डेटाबेस के अनुसार बताया कि मिस्र के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक और उलेमा परिषद बोर्ड के सदस्य अहमद अकाशेह ने टेलीविजन कार्यक्रम "सालतुत्तहरीर" जो सदाइल बलद उपग्रह नेटवर्क के साथ एक साक्षात्कार में बोलते हुए कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि पैगंबर (PBUH)के जीवन शैली अमल करें।
उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर पैगंबर (PBUH) के ज़माने में महिला शिक्षा नही लेती थीं इसलिए चाहिए कि कुरआन के नस को समझें न यह कि उस दौर का हवाला दें।
अहमद अकाशेह ने कहा कि पवित्र कुरान की व्याख्या जिसका अब प्रयोग किया जाता है समय की परिस्थितियों के अनुपात नहीं है बल्कि आधुनिकीकरण और संशोधन की जरूरत है।
मिस्र उलेमा परिषद बोर्ड के सदस्य अहमद अकाशेह ने कहा कि इस्लाम दया, रहमत और शांति का धर्म है, अब ज़रुरत है कि हम आपस में मेल मोहब्बत से जीवन ग़ुज़ारें।