अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) प्रेस टीवी के हवाले से, Svra आंग Ko ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा:कि इस्लाम म्यांमार में द्वितीय श्रेणी "नागरिकों से अल्पसंख्यक" का धर्म है जिन्हों ने 1948, में नागरिकता संघ क़ानून के सबब नागरिकता के अधिकार को हासिल किया है।
म्यांमार मुस्लिम एसोसिएशन ने सोमवार को एक बयान में इस बयान को "गैर जिम्मेदारना" कहकर इसकी आलोचना की है।
बयान में कहा गया है कि म्यांमार के कई संविधान में मुसलमानों का पूरा अधिकार सुरक्षित किया गया है।
लंदन स्थित इस संगठन ने जारी रखते हुऐ कहा: "देश के तीन संविधान 1947, 1974 और 2008 में, इस्लाम एक धर्म के रूप में पूर्ण नागरिकता के अधिकार के साथ परिचित किया गया है"
इस मंत्री ने इससे पहले इसी महीने में, देश में धार्मिक भेदभाव को रोकने के तरीक़े के बारे में एक सवाल के जवाब में कहा था 'इस्लाम इस देश में अधिक्तम मेहमान नागरिकों का धर्म है। "
उन्होंने ईसाइयों को पूर्ण नागरिकता वाला बताया और बल दिया कि: बौद्ध धर्म, म्यांमार का लोकप्रिय धर्म है।
रिपोर्टों के अनुसार, आंग सान सूची म्यांमार की सत्तारूढ़ पार्टी की नेता इस बात से कि एक मुस्लिम पत्रकार ने 2013 में उससे साक्षात्कार किया था, गुस्से में आगई थी।
सोची इसके बाद कि मिशेल हुसैन, बीबीसी के प्रेस रिपोटर, ने म्यांमार में मुसलमानों की हत्या के बारे में उसे चुनौती दी, गुस्से में आगई थी।
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपी संघ और कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ आशा वान हैं कि म्यांमार में नई सरकार के आनने से रोहिंग्या में मुसल्मानों की स्थिति में सुधार होगा।
हालांकि, रोहिंग्याई अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर उनके रुख की वजह से सूची की आलोचना की गई है।
रोहिंग्याई मुसल्मान वर्षों से है कि, यातना, उपेक्षा और दमन का सामना कर रहे हैं। अनौपचारिक रायय शुमारी के अनुसार उनमें से बड़ी संख्या मारी गई और हजारों दूसरे लोग बौद्ध चरमपंथियों के हमलों के प्रभाव से अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो गऐ हैं।
म्यांमार की सरकार रोहिंग्याई मुसलमानों के नागरिकता के अधिकार को रस्मी नहीं समझती है और उन्हें अवैध आप्रवासियों ही मानती है कि इसी विषय ने बौद्धयों कको मुसलमानों के दमन को अधिक कर दिया है ।
रोहिंग्याई मुसलमानों को 1982 से और म्यांमार के एक नए कानून के मद्देनजर, नागरिकता के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।