"नूर मुहम्मद" पूरे कुरान के पाकिस्तान हाफ़िज़ ने 33वीं अंतरराष्ट्रीय कुरान प्रतियोगिता के मौके पर अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) के साथ बात चीत में में कहा: मैं ने वर्ष 1997 में कुरान याद करना शुरू कर दिया और एक विशेष स्कूल में कुरान याद नहीं किया; मेरे पिता ने मुझे ऐक नज़दीकी शिक्षक के पास लेगऐ और मैं ने उनके मार्गदर्शन के साथ तीन साल में कुरान को याद कर लिया।
उन्होंने कहा: वर्ष 2000 में मैं ने पूरा कुरान संरक्षित किया और उसके बाद हमेशा अपने याद किऐ हुऐ को दोहराता रहा और अब भगवान की कृपा से पूरा कुरान याद के खजाने में महफ़ूज़ है और भूला नहीं हूं
हालांकि इस समय मैं वायु सेना में व्यस्त हूं और अब ज्यादा समय नहीं मिलता, लेकिन कोशिश करता हूं कुरान से अलग न रहूं व हर दिन कुरान पढ़ता हूं।
नूर मोहम्मद, 25 वर्ष के हैं और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रह रहे हैं। पाकिस्तान वायु सेना में पांच साल से काम कर रहे हैं।
उन्हों ने नारा "एक किताब, एक समुदाय" के बारे में कहा:यह नारा इतनी आसानी से चयन नहीं हुआ है, बल्कि इसके ऊपर बहुत सोचा गया है कुरान की आयतों और रवायतों से लिया गया है, और विशेष रूप से इन आयतों " «وَاعْتَصِمُواْ بِحَبْلِ اللّهِ جَمِيعًا وَلاَ تَفَرَّقُواْ» و «إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ إِخْوَةٌ» के बारे में इशारा है ।
उन्होंने कहा: कि प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय घटना मुस्लिम जगत की एकता को मजबूत करने के लिए एक साधन है और उसका नारा "एक किताब, एक समुदाय" भी इस तथ्य को दर्शाता है।
नूर मोहम्मद ने कहा: हम कुरान प्रतियोगिताएं आयोजित करते हैं इस लक्ष्य के साथ कि मुसलमान एक दूसरे को देखें और उनके बीच एकता क़ायम हो है और इसी कारण यह नारा बहुत फ़िट है।