
अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने खबर "मनामा पोस्ट" के हवाले से बताया कि अहमद अल-सफ्फार ने 2 अक्तुबर अपने खाते सामाजिक नेटवर्क ट्विटर में संदेश जारी कर कहा कि आशूरा के अवसर पर शोक प्रकट करने वालों पर 2011 से बाद हमला आले खलीफा शासन द्वारा सांप्रदायिक उत्पीड़न करना बहरीन के शियों के हक को समाप्त करना है जो अंतरराष्ट्रीय संधियों की परवाह किए बिना है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने अपने संदेश में लिखा है कि: "घटनाएं जिसको हम बहरीन में आज देख़ रहे हैं यह इस देश में शियों पर सांप्रदायिक उत्पीड़न हैं।
इस संबंध में 14 फरवरी गठबंधन ने बहरीन के लोगों से आग्रह किया है कि आले खलीफा शासन के गुर्गे की अपवित्रता को रोके।