
अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) ने »The Nation« अखबार द्वारा उद्धृत किया कि शोक समारोहों में प्रवेश करने वाले अज़ादारों पुलिस की एक बड़ी संख्या नज़र रख़ रही है।
मुहर्रम के दौरान कश्मीर और भाषण करने के लिए विद्वानों निषिद्ध कर दिया है और इस क्षेत्र में पुलिस बल कड़ी निगरानी रख रही है।
मुहर्रम शोक समारोह के पहले दशक में 530 मज्लिस और 410 अन्जुमनें अज़ादारी करती हैं जिस पर पुलिस बल विशेष ध्यान दे रही है ताकि कोई ग़डबड़ी ना फैलने पाए।