
अंतरराष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) समाचार एजेंसी «Arakanna» के हवाले से, इन बैठकों में से एक में कि 300 से अधिक बौद्ध की भागीदारी के साथ आयोजित की गई जिस में रोहिंग्याई मुस्लिम अल्पसंख्यकों की संपत्ति और भूमि को लूटने के लिऐ नए तरीकों और कानूनी उपायों को पेश किया गया।
साथ ही इस अवसर पर मुसलमानों के साथ जीवन कमाने के लिए किसी भी गतिविधि में भाग लेने के तरीकों पर रोक लगाने का अध्ययन किया गया।
हालांकि इन बैठकों का आयोजन म्यांमार की लोकतंत्र का मज़ाक़ है, स्थानीय अधिकारियों ने बैठकों की सामग्री का पूरा ज्ञान होने के बावजूद इसके बारे में कोई भी कार्वाई नहीं की।
म्यांमार नियमों के अनुसार एक मिल्युन और तीन लाख रोहिंग्याई मुसलमानों कि, ज्यादातर म्यांमार के पश्चिम राख़ेन में रह रहे हैं नागरिकता के अधिकार से वंचित हैं और विस्थापितों में गिने जाते हैं।
2012 के बाद से बौद्ध रहबरों द्वारा जातिवाद अभियान चलाऐ जाने के कारण बहुत से रोहिंग्याई मुसलमानों की मौत हो गई है और बहुत से विस्थापित होगऐ हैं।
वर्तमान समय में भी रोहिंग्याई बच्चे, पुरुष और महिलाऐं बौद्धों के दबाव में रह रहे हैं,समाजिक, कानूनी और आर्थिक भेदभाव ने उनके जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया है ।