अंतर्राष्ट्रीय कुरान न्यूज एजेंसी (IQNA) ने Free Malaysia Today के अनुसार बताया कि अमरिका के डेनवर यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर मिडल ईस्ट स्टडीज के निदेशक नादिर हाशमी ने कहा कि " मोहम्मद असरी ज़ैनुल आब्दीन द्वारा दावा किया गया है कि शिया लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है जिस से शिया के बारे में उसके अज्ञानता और ज्ञान की कमी का पता चलता है।
उन्होंने कहा: "शायद अगर असरी अपना कम समय वहाबी के अध्ययन करने में लग़ाने के बजाए जिस विषय के बारे में बोल रहा है अध्ययन कता तो जनता की राय के अदालत में इतना शर्मिन्दा नहीं होता।
असरी प्रोफेसरों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं आलोचना के बाद दावा किया था कि शिया मुसलमान मलेशिया की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
मलेशिया में एक शिया कार्यकर्ता के लापता होने पर इस पर पहले आरोप लगाया गया था।
ध्यान दिया जाना चाहिए कि मलेशियन नेशनल काउंसिल ऑफ मुफ्ती ने 1 9 6 में शियावाद को एक ग़ुमराह मज़हब बताया था और कई वर्षों से शियों और इस्लाम के अन्य मसजिदों इसकी निंदा की जाती है।
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