इंटरनेशनल कुरान न्यूज एजेंसी (IQNA) ने WCVB Boston न्यूज एजेंसी के मुताबिक बताया कि इस ऑनलाइन प्रणाली का नाम जीओफ़ियाडिया है जिसका 2014 से 2016 तक साइबरस्पेस में मुस्लिम गतिविधियों को अध्ययन करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक बोस्टन पुलिस ने इस प्रणाली का इस्तेमाल कर सामान्य मुसलमानों के जीवन पर निगरानी किया, लेकिन उन्होंने शहर में गंभीर अपराधों को हल करने के लिए कुछ भी नहीं किया।
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन ने कहा है कि पुलिस ने मुस्लिमों की गलत तरीके से जासूसी की है और उनके राजनीतिक और धार्मिक विचार दर्ज किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस केवल धर्म, जाति और जातीयता के आधार पर उन्हें जासूसी के तौर पर निशाना बनाया है।
बोस्टन पुलिस ने इस रिपोर्ट के जवाब में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन को झूठी रिपोर्ट प्रकाशित करने का आरोप लगाया और कहा कि हमने हिंसा को रोकने के लिए इस जासूसी के प्रोग्राम का इस्तेमाल किया है।
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