तेहरान (IQNA)इराक में कोरोना बीमारी के फैलने के बाद, इराकी अधिकारियों ने इस देश के शहरों, विशेष रूप से ज़ियारती शहरों और धार्मिक स्थलों में हर तरह की भीड़ जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया।

रूसया अलयौम की रिपोर्ट के अनुसार, इराक में कोरोनोवायरस की रोकथाम पर विशेष संकट समिति ने एक बयान में जोर दिया: देश में कोरोनावायरस के फैलने और महामारी से कई हमशहरयों के मुब्तला होने तथा कई लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हो जाने के कुछ ही हफ्तों बाद, हमारी राष्ट्रीय, नैतिक और व्यावसायिक जिम्मेदारी की आवश्यकता थी कि शुरू से ही इराकी लोगों को रोगियों और मौतों की संख्या पर ध्यान कराते रहें।
समिति ने कहा: विश्व स्वास्थ्य संगठन के सामान्य कानून और डब्ल्यूएचओ विधेयकों के संकल्प वर्ष 1981 के 89 के आधार पर, और एहतियाती उपायों के बावजूद, किसी भी रूप में निरंतर सभाऐं कोरोना वायरस के प्रसार के लिए सबसे खतरनाक कारकों में से हैं। इसलिए, पिछले निर्णयों पर जोर देते हुए, हमने आदेश दिया है कि इन कार्यों को जारी रखा जाए और हर तरह की भीड़ व रैलियों को प्रतिबंधित किया जाए।
इस बयान में बल दिया गया हैःसंकट समिति ने कोरोनोवायरस के संचरण को रोकने और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए पवित्र शहरों और तीर्थ स्थानों पर किसी भी तरह की भीड़ और ज़ायरीन के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगाने को मंजूरी दी है। सभी खेल आयोजनों और समारोहों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, और नागरिकों को आगाह किया जाता है कि किसी भी खुशी या शोक के उत्सव को मनाने के लिए इकट्ठा ना हों।
इराकी संकट समिति ने चीन, ईरान, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान, थाईलैंड, सिंगापुर, कुवैत और बहरीन से इराक में आने वाले लोगों को 14 दिनों तक एक घर की संगरोध सुविधा में रहने के लिए कहा है ता कि स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सा समूह घर पर उनकी स्थिति की जांच करें।
याद रहे कि 9 मार्च सोमवार की शाम तक, इराक़ में कोरोनरी की बीमारी वाले लोगों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जिनमें से 6 की मौत हो चुकी है।
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