तेहरान(IQNA) भारत के मुसलमानों पर सख्ती और धमकी के बाद भारत की आर्थिक वृद्धि में तेज गिरावट न केवल दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक भारी झटका होगी, बल्कि आंतरिक विभाजन और समस्याओं को भी बढ़ाएगी और युवा बेरोजगारी का शिकार होंगे।

भारत से; कश्मीर के मुस्लिम राज्य में इंटरनेट को बाधित करना और मुस्लिम भूमि को जब्त करने की धमकी से लेकर,भारत के पूर्वी हिस्से में रहने वाले मुस्लिम प्रवासियों से नागरिकता के छीनने तक विशेष रूप से बंगाल राज्य में, ऐक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को जिसे कोरोना ने जनम दिया बढ़ा रही है।
इस प्रक्रिया ने भारत के लिऐ भारी नुक़्सान दिया है; भारत की आर्थिक वृद्धि तेजी से धीमी हुई है, जबकि हाल के वर्षों में अधिकांश विशेषज्ञों ने विश्व मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और उभरने की बात कही थी, और भारत की अर्थव्यवस्था का विकास निरंतर जारी रहने को हत्मी कहा था लेकिन अब स्थिति अलग है और इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए गंभीर नुकसान की भरपाई के लिए भारत सरकार के सामने चुनौती बहुत गहरी और कठिन है।
भारत सरकार की भविष्यवाणी है कि 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पांच प्रतिशत होगी। यह 2009 के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे कम विकास दर है, और हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर - 2017 में - आठ प्रतिशत से अधिक थी।
भारत जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्था में वृद्धि में यह तीव्र गिरावट, जिसे दुनिया की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता था, अब न केवल दुनिया की अर्थव्यवस्था को कड़ी टक्कर देगी, बल्कि आंतरिक विभाजन और समस्याओं को भी बढ़ाएगी। भारतीय अर्थव्यवस्था को एक महीने में दस लाख नई नौकरियां पैदा करने के लिए तैयार किया गया था ताकि भारत में युवाओं की भारी बाढ़ बेकार न रहे, इस लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहने से, भारत सरकार की नीतियों के साथ युवाओं की समस्याएं धीरे-धीरे खुद को प्रदर्शित करेंगी।
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