IQNA

16:13 - August 16, 2020
समाचार आईडी: 3475055

मलेशियाई इस्लामी संगठनों द्वारा यूएई फ़तवा परिषद के फैसले की निंदा

तेहरान (IQNA) मलेशियाई इस्लामिक एनजीओ के एक समूह ने एक बयान में, ज़ायोनी शासन के साथ देश के संबंधों के सामान्यीकरण की औचित्य और पुष्टि करने में यूएई फ़तवा परिषद के फैसले की निंदा की।

मलेशियाई इस्लामी संगठनों द्वारा यूएई फ़तवा परिषद के फैसले की निंदा
मलेशिया से, इस्लामिक एनजीओ के एक समूह ने एक बयान जारी कर इज़राइल के साथ देश के संबंधों को सामान्य बनाने की अनुमति देने में यूएई फ़तवा काउंसिल की स्थिति की निंदा की। बयान में कहा गया है, हमें यूएई फतवा परिषद के रुख़ पर जो संबंधों के सामान्यीकरण और यूएई द्वारा इजरायली शासन की मान्यता का समर्थन करता है, अफसोस है।
 
बयान जारी रखते हुऐ कहा गया: हम दोबारा अपनी स्थिति की पुष्टि करते हैं कि यह कार्रवाई न केवल फिलिस्तीनी अरमानों के साथ विश्वासघात है, बल्कि इस्लामिक उम्मह और विशेष रूप से बैतुलमुक़द्दस और अल-अक्सा मस्जिद के प्रतिवाद (मुक्ति) के लिए भी नुक़सान देह है।
 
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा: यह मुद्दा अनिवार्य रूप से इजरायल की वैधता और फिलिस्तीनियों के निरंतर उत्पीड़न का मामला है। हमारी स्थिति यह है कि यूएई नेतृत्व द्वारा संबंधों के सामान्यीकरण का "सही और उचित" कार्रवाई के रूप में इस परिषद का मूल्यांकन ग़लत और अस्वीकार्य है। हम इस संबंध में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नहयान के समर्थन में इस परिषद के तर्क की मंतिक़ को नहीं समझ सकते।
 
बयान के एक अन्य भाग में, यह कहा गया है: हमें यूएई नेतृत्व के कार्यों में इस देश के लोगों के सर्वोच्च हितों के लिए कोई बुद्धि नहीं दिखती है, जैसा कि यूएई फतवा परिषद इसे अनुमोदित करती है।
 
बयान में निष्कर्ष निकाला गया, हम यह नहीं समझ सकते कि परिषद कैसे निष्कर्ष निकालती है कि एक नाजायज शासन किस तरह क्षेत्र में शांति प्राप्त करने के कारक के रूप में हो सकता है। इजरायल विश्व शांति के लिए एक कैंसर है और इसका अस्तित्व अवैध है।
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