IQNA

आमाले "लैलत अल-रग़ाएब"; ईश्वर बहुत क्षमा करता है

15:46 - February 18, 2021
समाचार आईडी: 3475637
तेहरान (IQNA) आज रजब की पहली शबे जुमा है आज "लैलत अल-रग़ाएब" है एक एसी रात जिस रात में दुआ कुबूल होने के लिए सबसे अच्छे समय में से एक है। दुनिया के सभी लोगों के स्वास्थ्य के लिए दुआ करें।

इकना के अनुसार, आज पवित्र महीने रजब की शबे जुमा है आज "लैलत अल-रग़ाएब" है। कहा जाता है कि इस रात फरिश्ते धरती पर उतरते हैं और लोग़ों के शुद्ध इरादों के संदेश को भगवान तक पहुँचाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
आज रात दुआ कुबूल होने के लिए सबसे अच्छी रात है क्योंकि भगवान इस रात अपने बंदों को माफ करने के लिए बहुत उत्सुक होता हैं। तो आज की रात भगवान से प्रार्थना करने के लिए सबसे अच्छी रातों में से एक है और सबसे अच्छा आशीर्वाद, जिसमें से एक निश्चित रूप से स्वास्थ्य है।
इस रात के लिए, कुछ आमाल भी बताए ग़ए हैं  कि रोज़े का सबसे अधिक सवाब है। पैगंबर (PBUH) से रवायत है कि: रजब महीने के पहले शुक्रवार की रात से ग़ाफिल मत रहो, क्योंकि ईश्वर के दूत फरिश्ते आज "लैलत अल-रग़ाएब" को कहते हैं कि भगवान आज रात बहुत क्षमा करता है।
"लैलत अल-रग़ाएब" के आमाल में, यह उल्लेख है कि शुक्रवार की रात मग़रिब और ईशा की नमाज़ के बीच बारह रकात दो दो रकात कर के एक सलाम से अदा करे, और प्रत्येक रकात में, सूरह अल-हमद, सूरह अल-क़द्र, बारह बार सूरह तौहीद  के साथ पढे और जब बारह रकअत पूरी हो जाए, तो मोहम्मद व आले मोहम्मद पर बर सलवात भेजे, और फिर उसके बाद सज्दे में  सत्तर बार "सुब्बुहुन क़ुद्दुस रब्बुल मलाइकते वर्रुह पढना जाना चाहिए। फिर सज्दे से सर उठा कर  सत्तर बार "रब्बी इग़फिर वर्हम व तजावुज़ अम्मा तालम इन्नक अन्तल अलीयुल आज़म" और अपनी हाजत को अल्लाह से तलब करे।
इस नमाज़ की फज़ीलत के बारे में कहा गया है कि इस नमाज़ को पढ़ने वाला कोई भी एसा नहीं है जिसके पाप क्षमा न हों यहां तक कि अग़र उसके ग़ुनाह पहाड़ों के वजन और रेगिस्तानों की रेत और समुद्र पर फर्श का आकार के बरार हों और यह व्यक्ति दूसरों की भी शिफाअत कर सकता है।
3954771
captcha