
सोमवार से ही शोक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है।
मंगलवार को हिजरी क़मरी कैलेंडर के दूसरे महीने सफ़र की 28 तारीख़ है, इसी दिन पैगम़्बरे इस्लाम का स्वर्गवास हुआ था और उनके नाती हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम भी इसी दिन शहीद कर दिए गए थे।
अपने स्वर्गवास से पहले पैग़म्बरे इस्लाम ने बड़े कठिन संघर्ष के साथ लोगों तक इस्लाम धर्म पहुंचाया और उसकी जीवनदायक शिक्षाओं को लागू किया।
इमाम हसन अलैहिस्सलाम भी पूरा जीवन इस्लाम और मुसलमानों की सेवा करते। उन्हें आज के दिन 47 साल की उम्र में उनकी पत्नी के हाथों मुआविया ने शहीद करवा दिया था।
इस दुखद अवसर पर राजधानी तेहरान के अलावा पवित्र नगर मशहद और पवित्र नगर क़ुम सहित पूरे ईरान में शोक कार्यक्रमों, नौहा व मातम का सिलसिला जारी है।