
आर. एस. एस के खिलाफ काम करना है तो,सबसे पहले हमें एकजुट होना होगा। मौलाना क्लबे जववाद का कौम के बुद्धिजीवियों, चिंतको और धर्मगुरूओ से आह्वान। बी.जे.पी और आर.एस.एस से समबन्ध के आरोप का तार्किक उत्तर;
हैदराबाद (सफीर न्यूज़) मुतमिद उमई मजलिस ए उल्माए हिन्द के एक दिवसीय दौरे हैदराबाद के अवसर पर गुलसिताने अमीर उल मोमेनीन में उल्मा ए दकन हैदराबाद के विशेष आयोजन के दौरान जनाब जाफर हुसैन मदिरे आला सदा ए हुसैनी से विशेष बातचीत का खुलासा आज पाठकों की सेवा में प्रस्तुत किया जाएगा। सपषट रहे कि मौलाना मौसूफ पर विभिन्न हलकों की जानिब से आरोप का सिलसिला जारी रहता है। इसीलिए आज सदा ए हुसैनी और सफीर टी.वी. के सम्पादक से विस्तृत बातचीत करते हुए इन तमाम प्रश्नों के उत्तर जानने का प्रयास किया है। जोकि पाठको के लिए काफी महत्वपूर्ण ज्ञान और मौलाना मौसूफ के पक्ष ( मौक़िफ) के सम्पूर्ण स्पष्टीकरण और संशय को दूर करेंगे। प्रस्तुत है मौलाना से विस्तार से बातचीत की जनाब जाफर हुसैन साहब ने सबसे पहले मौलाना क्लबे जववाद पर लगने वाले आरोप के समबन्ध में स्पष्टीकरण (वज़ाहत) तलब की। जिसके तहत ये कहा जाता है कि मौलाना बीजेपी और आर.एस.एस के लिए काम करते हैं इस सवाल का जवाब देते हुए मौलाना मौसूफ ने कहा कि मेरा किसी भी जमात या उसके एजेंडे से कोई लेना देना नहीं है बल्कि मैंनें सत्ता के घमंडी गर्दनो को अपने क़ौम के हित में झुकाया है। उनहोंने कहा कि देश के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से उनकी मुलाकातें होती रहती हैं। जिस में खास तौर पर मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती और राहुल गांधी शामिल हैं।अपने उपर बीजेपी से समबन्ध वाले आरोप का खंडन करते हुए इनहोने ने कहा कि,इस तरह के आरोप वही लोग लगाते हैं जिनके पास कोई काम नहीं होता है। और न ही इन्हे क़ौम की कोई फिक्र होती है। मौलाना ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल हमारे लिए अछूत नहीं है। मुदीर ए आला सदा ए हुसैनी रोजनामा के एडिटर सैयद जाफर हुसैन साहब ने ये पूछा कि मौलाना मौसूफ के आर.एस.एस से नज़दीकि के काफी चर्चे है। इस पर मौलाना मौसूफ ने कहा कि पुरे देश में आर.एस.एस का विरोध सबसे ज्यादा किसी ने की है,तो मैंने की है इस बात का सबूत मेरे पुराने बयान और इंटरव्यू है। जो देखे जा सकते हैं। उनहोंने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि मेरे खिलाफ इस नेगेटिव प्रचार के लिए कुछ मिललत के रहनुमा भी जिम्मेदार हैं। एक और महत्वपूर्ण सवाल कि मौलाना ने कशमीर घाटी में अलग शिया वक़फ बोर्ड का मुद्दा कशमीर में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया था। मौलाना ने कहा कि वादी में जो उलेमा औक़ाफी संपति पर क़बज़ा किये हुए हैं, और क़ौम को नुकसान पहुंचा रहें हैं,और शिया वक़फ बोर्ड को क़ायम नहीं कर रहे हैं। ये वक़त की मांग है कि अलग बोर्ड का गठन हो कयोंकि जब बोर्ड अमल में आता है तो मजलिसे आमला का भी गठन होगा और तब जाकर औक़ाफी संपतियो की हिफाज़त होगी। इनहोने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर रौशनी डालते हुए कहा कि मेरे ओर से प्रस्तावित अलग शिया वक़फ बोर्ड का गठन क़ौम के हित में होता न कि किसी लोग या राजनीतिक दल के हित में है, उनहोंने सपषट कहा कि मेरा मक़सद क़ौम की भलाई और स्थिरता में हैं। ना कि परिवारवाद और वंशवाद के हितों को साधना। मौलाना कलबे जववाद ने कहा कि मजलिसे उलेमा ए हिन्द जो कि शिया उलेमाओं की एक सर्वमान्य और सरकारी तौर पर मान्यता प्राप्त तनज़ीम है।और पुरे देश में इसके कार्यलय हैं। इसकी प्रशंसा पुरे देश में हो रही है। मौलाना तक़ी रज़ा आबेदी इसके सेक्रेटरी के रूप में नुमाया काम अंजाम दे रहे हैं। उनहोंने कहा कि ये मेरा एक दिवसीय पारिवारिक दौरा है। मजलिसे उलेमा ए हिन्द के अन्तर्गत एक विस्तृत दौरे की भी योजना है। उनहोंने एक बार फिर इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि मेरा आर.एस.एस और बीजेपी से कोई संबंध है इस तरह का आरोप घटिया सोच के लोग ही लगाते हैं। उनहोंने आर.एस.एस के खिलाफ इस लड़ाई में उलेमाओं को शामिल होने की दावत दी।
source: sadaehussaini