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कुरान का ज्ञान / 5

धर्म आशा का एक कारण है और आत्महत्या के लिए एक रोक है

14:17 - November 24, 2022
समाचार आईडी: 3478137
तेहरान (IQNA):यदि धर्म को एक कार्यक्रम और लाइफ इसटाइल के रूप में माना जाए, तो एक आस्तिक, आशा और आनंद के साथ एक बामक़सद जीवन जिएगा। ऐसे में आत्महत्या करने का कोई कारण नहीं बनता है।

यदि धर्म को एक कार्यक्रम और लाइफ इसटाइल के रूप में माना जाए, तो एक आस्तिक, आशा और आनंद के साथ एक बामक़सद जीवन जिएगा। ऐसे में आत्महत्या करने का कोई कारण नहीं बनता है।

 

अमेरिकी दानिशमंदों द्वारा की गई एक तहक़ीक़ में, जो 2004 तक अपनी तरह की पहली थी, आत्महत्या और धर्म के बीच संबंधों की जांच की गई। इस तहक़ीक़ में, जिसको बहुत सावधानी से किया गया था, बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जिन्होंने आत्महत्या की कोशिश की या जिन्होंने वाकेइ आत्महत्या की। 

आत्महत्या करने वाले लोगों के रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछने और उनकी धार्मिक और सामाजिक वास्तविकता की जांच करने पर पता चला कि उनमें से ज्यादातर अधार्मिक (गैर-धार्मिक) हैं जिन्होंने अपने जीवन और दुखों से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या कर ली।

अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन ने आत्महत्या की घटनाओं को कम करने में धार्मिक शिक्षाओं के मजबूत प्रभाव को साबित किया। और यह भी साबित हुआ कि शादी और बच्चे होने और खुशी, और अच्छे सामाजिक संबंधों का जीवन और आशा की भावना पैदा करने पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस अध्ययन के परिणाम निम्नलिखित तथ्य हैं:

नास्तिकों के बीच आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा है।

अविवाहित लोगों में आत्महत्या की दर अधिक थी।

जिन लोगों के अधिक बच्चे हैं उनमें आत्महत्या की दर कम है।

नास्तिक दूसरों की तुलना में अधिक आक्रामक होते हैं।

एक आस्तिक कम गुस्सीला, आक्रामक और हमलावर होता है।

धर्म जीवन के बोझ और तनाव को सहन करने में मदद करता है और विभिन्न मानसिक विकारों से पीड़ित होने की संभावना को कम करता है।

नास्तिकों का कोई सामाजिक संबंध नहीं था, इसलिए उनके लिए आत्महत्या करना आसान था।

यह तहक़ीक़ एक सिफारिश के साथ समाप्त हुई: आत्महत्या की घटना के लिए धार्मिक संस्कृति एक मुनासिब इलाज है।

यह नतीजा निकाला जा सकता है कि ईमान, विवाह और औलाद ऐसे कारक हैं जो आत्महत्या को नफ्सियात के मरीज लोगों से दूर रखते हैं; अलबत्ता, यह तहकीकात गैर-मुसलमानों पर की गई थीं, क्योंकि मुसलमान इस घटना से कम प्रभावित होते हैं और इस्लाम आत्महत्या को सख्त मना करता है। इस शोध में कहा गया है: मायूसी और नाउम्मीदी को रोकने में धर्म एक महत्वपूर्ण कारक है!

शायद हमें प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक कार्नेगी की आत्महत्या की कहानी याद हो, जिसने कई किताबें लिखीं और मशहूर हुआ और पैसा कमाया। लेकिन उसने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके जीवन का कोई मक़सद नहीं था!

मुसलमान सलाह देते हैं कि आप अपने आप को इस हैरतअंगेज प्रार्थना के साथ पेश करें: 

«رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُ: 

खुदाया! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को (सही रास्ते से) न भटका! और अपनी ओर से हम पर दया कर, क्योंकि तू क्षमा करने वाला है।” (अल-इमरान/8)।

 

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