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कुरान का ज्ञान / 6

क़यामत का दिन और कुरान का चमत्कार

7:37 - November 26, 2022
समाचार आईडी: 3478147
तेहरान (IQNA):पिछली दो शताब्दियों में, जानवरों, विशेष रूप से कीड़ों का जीवन इंसानों के लिए काबिले तवज्जो और हैरतअंगेज़ रहा है।
क़यामत का दिन और कुरान का चमत्कार

पिछली दो शताब्दियों में, जानवरों, विशेष रूप से कीड़ों का जीवन इंसानों के लिए काबिले तवज्जो और हैरतअंगेज़ रहा है। मनुष्य वर्षों से कीड़ों के व्यवहार का  मुशाहिदा कर रहा है और उसने बड़ी तहकीकात की हैं। लेकिन यह दिलचस्प है कि सदियों पहले कीड़ों की छोटी और नाजुक हरकतों को इस्लाम ने नोट किया था।
इकना के अनुसार; समय बीतने के बावजूद, कुरान मजीद के चमत्कार के नए पहलू प्रकट हो रहे हैं, जो अपने तरीके से दिलचस्प और हैरतअंगेज़ हैं और यह एक निश्चित प्रमाण है जो बताता है कि यह किताब कोई मानवीय शब्द नहीं है और यह कि सबसे सटीक तरीके से ब्रह्मांड बनाने वाले अल्लाह ने इसे भेजा है।
जिन उदाहरणों का उल्लेख किया जा सकता है उनमें से एक सूरह क़ारेआ की आयत 4 में है:
«يَوْمَ يَكُونُ النَّاسُ كَالْفَراشِ الْمَبْثُوثِ:
जिस दिन लोग (भ्चिंता में) बिखरी हुई तितलियों की तरह होंगे।
यह आयत क़ियामत के दिन इंसानों की हालत की तुलना हवा में बिखरी तितलियों से करती है।
क़यामत के दिन, मनुष्य भय और चिंता की स्थिति में होगि और नहीं जानता होगा कि वह कहाँ जा रहा है; ठीक एक तितली की तरह जो बेतरतीबी के रूप से उड़ती है और यह नहीं जानती कि वह कहाँ जा रही है।
इस आयत में "अल-मबसूसالمبثوث" शब्द का अर्थ बिखरा हुआ है। इस आयत में अल्लाह ने क़यामत के दिन लोगों की तुलना हर जगह बिखरी तितलियों से की है; क्योंकि इस दिन लोग चीख़ रहे हैं, बेताब और चिंतित हैं, हर कोई व्यस्त है और भय की स्थिति में है।
शब्द "तितली" का प्रयोग केवल क़यामत के दिन मनुष्यों की स्थिति का वर्णन करने के लिए सूरह क़ारेआ की आयत 4 में किया गया है। अलबत्ता, इस तशबीह का उल्लेख सूरह क़मर में भी किया गया है, लेकिन इस बार इंसानों की तुलना बिखरी हुई टिड्डियों से की गई है: «كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتِشِرٌ: तितर-बितर टिड्डियों की तरह" (क़मर/7), यानी इंसान क़यामत के दिन हवा में बिखरी हुई टिड्डियों की तरह चलेंगे।
मुफस्सिरों के अनुसार, ये दो आयतें न्याय के दिन के संबंध में दो अलग-अलग स्थितियों का उल्लेख करती हैं; उनमें से एक यह है कि जब लोग घबराहट में कब्र से बाहर आते हैं, तो वे बिखरी हुई तितलियों की तरह एक-दूसरे की ओर खिंचे चले आते हैं और एक-दूसरे से टकराते हैं। दूसरी हालत तब होती है जब एक मुनादी पुकारता है और लोग उसका जवाब देते हैं और बिखरी हुई टिड्डियों की तरह समूहों में उसकी ओर बढ़ते हैं:
«يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُنْتَشِرٌ:
बिखरी हुई टिड्डियाँ की तरह [अपनी] कब्रों से निकलेंगे। (क़मर/7)
क़ियामत के दिन इंसानों की तुलना तितलियों और टिड्डियों से करना कुरान मजीद के चमत्कारों में से एक है। क्योंकि 1400 साल पहले कुरान नाजिल हुआ था; जबकि तितली और टिड्डे का जीवन चक्र पिछली दो शताब्दियों में ही खोजा गया है, और 14 शताब्दी पहले, इन दोनों कीड़ों के जीवनचक्र और गति पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसलिए, पवित्र कुरान इस एक इलमी तशबीह देने में पेश कदम रहा है, जो इस  अजीम किताब का कमाल, बारीक बीनी और उसकी गहराई दिखाता है

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