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कुरान की शख़्सियत/17

हज़रत इस्हाक़; बनी इस्राईल के नबियों के पूर्वज

15:09 - November 28, 2022
समाचार आईडी: 3478162
हज़रत इस्हाक़ पैगंबर, हज़रत इब्राहीम (pbuh) के दूसरे बेटे हैं जो हज़रत इस्माईल (pbuh) के बाद नबूवत तक पहुंचे। इस्हाक़ इस्रराईल के नबियों के पूर्वज है और जो पवित्र कुरान में वर्णित है, उसके अनुसार इस्हाक़, इब्राहीम और अपकी माँ सारा के लिए अल्लाह की ओर से एक तोहफ़ा थे।

हज़रत इस्हाक़ पैगंबर, हज़रत इब्राहीम (pbuh) के दूसरे बेटे हैं जो हज़रत इस्माईल (pbuh) के बाद नबूवत तक पहुंचे। इस्हाक़ इस्रराईल के नबियों के पूर्वज है और जो पवित्र कुरान में वर्णित है, उसके अनुसार इस्हाक़, इब्राहीम और अपकी माँ सारा के लिए अल्लाह की ओर से एक तोहफ़ा थे।  

 

इसहाक अल्लाह के नबियों में से एक हैं और इब्राहीम के दूसरे पुत्र हैं। इस्हाक़ की माता का नाम सारा है। वह फिलिस्तीन में पैदा हुए थे और वहीं रहते थे। उनका जन्म इस्माईल के पांच या 13 साल बाद बताया जाता है। जब इस्हाक़ का जन्म हुआ, तब इब्राहीम की आयु 100 वर्ष से अधिक थी और उसकी माता की आयु 90 वर्ष थी।

कुरान की आयतों के अनुसार, अल्लाह ने इस्हाक़ के जन्म की ख़बर उनके माता-पिता को दी थी: 

«وَامْرَأَتُهُ قَائِمَةٌ فَضَحِكَتْ فَبَشَّرْنَاهَا بِإِسْحَاقَ وَمِنْ وَرَاءِ إِسْحَاقَ يَعْقُوبَ:

और उनकी ज़ोजा खड़ी थीं और (वह इस बात पर) हँसीं, तो हमने उन्हें इस्हाक़ और इस्हाक़ के बाद याकूब की ख़ुशख़बरी दी" (हूद/71)।

अपने भाई इस्माईल की मृत्यु के बाद, इस्हाक़ ने नबुव्वत में उनका स्थान लिया, और उनके बाद सभी नबी इसहाक की पीढ़ी से थे पैगंबर मुहम्मद को छोड़कर, जो इस्माईल की नस्ल से थे।

कुरान में, इसहाक की नबुव्वत के बारे में सीधे तौर पर या किसी और बात को लेकर 8 आयतें हैं; उनमें इस्हाक़ की नबुव्वत, उनकी औलाद पर पाक किताब का नाजिल होना, इसहाक को शरियत अता करना, उन पर वही नाजिल होना, उनकी पैरवी करने का हुकुम और इस्हाक़ की इमामत का जिक्र है। इन आयतों में, इस्हाक़ का धर्म और कानून वही धर्म था जो उनके पिता इब्राहीम का था, यानी हनीफ धर्म, जो एकेश्वरवाद यानी तौहीद पर आधारित है।

अलबत्ता, इनमें से किसी भी आयत में ऐसी आसमानी किताब का जिक्र नहीं है जो उन पर नाजिल हुई थी। ऐतिहासिक स्रोतों में खोज करने पर, ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो उनके लिए किसी आसमानी किताब के नाजिल होने को साबित करता हो।

कुरान में इस्हाक़ के लिए वर्णित अन्य विशेषताओं में, हम तोहीद यानी एकेश्वरवाद को मानने वाले, नेक और ईमानदार, इमाम, खुलूस रखने वाले, शक्ति और समझदार का उल्लेख कर सकते हैं।

तोरैत में, इब्राहीम की औलाद में से एक को ज़िबह करने की बात इस्हाक़ की तरफ मनसूब की गई है। यहूदी मानते हैं कि अल्लाह ने इब्राहीम को इस्हाक़ की कुर्बानी करने का आदेश दिया था।

40 साल की उम्र में इस्हाक़ ने रफ्का नाम की लड़की से शादी की और ईस और याकूब नाम के दो बच्चे हुए। अपनी मृत्यु से पहले, उन्होंने अल्लाह के हुक्म के के अनुसार अपने पुत्र याकूब को नबूवत सौंप दी थी। 

तौरैत किताब की उत्पत्ति में जो उल्लेख किया गया है, उसके अनुसार, अपने जीवन के अंत में, जब वह बूढ़े और नाबीना हो गए थे, इस्हाक़ (pbuh) ने अपनी औलाद में से एक को अपने वसी के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया, और इस तरह यह पद याकूब (pbuh) के पास गया। उसके बाद, इस्हाक़ 20 साल तक और जीवित रहे और अंत में 180 वर्ष की आयु में हेब्रोन (अल-खलील) में उनकी मृत्यु हो गई।

कुछ टिप्पणीकारों और इतिहासकारों के अनुसार, इस्हाक़ 160 वर्षों तक जीवित रहे और उन्हें यरूशलेम के पास, वर्तमान फिलिस्तीन के अल-खलील शहर में दफनाया गया। 

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