
हसन अल-ज़ब्हावी सूरह आले-इमरान की आयत 37 पढ़ते हैं «كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا الْمِحْرَابَ وَجَدَ عِنْدَهَا رِزْقًا قَالَ يَا مَرْيَمُ أَنَّى لَكِ هَذَا قَالَتْ هُوَ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ يَرْزُقُ مَنْ يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ: हर बार ज़कर्यह मिहराब में प्रवेश करते तो उनके पास [किसी प्रकार का] भोजन मिलता था [वह कहते] हे मरियम, यह तुम्हारे लिए कहां से आया [उसने उत्तर दिया] कि यह परमेश्वर की ओर से है, कि परमेश्वर जिसे चाहे असीमित जीविका देता है" और पहली आयत उन्होंने सूरह कौषर « إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَرَ: हमने आपको [कौषर का स्रोत] दिया"की आस्ताने अब्बासी के कुरानिक सभा "अर्श सस्वर पाठ" में नहावंद और बयात के स्थान पढ़ा है, जो कि क्रिसमस और ईसा मसीह के जन्म का अवसर (pbuh)प्रकाशित हुआ।
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