IQNA

कुरान क्या कहता है/50

विश्वासियों की एकता

16:14 - May 09, 2023
समाचार आईडी: 3479069
तेहरान(IQNA)विचारों और मतों का अंतर कभी-कभी विश्वासियों के बीच अलगाव और दूरी पैदा करता है। लेकिन कुरान एक खास उपाय पेश कर सभी को एकता की ओर आमंत्रित करता है।

وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا وَاذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنْتُمْ أَعْدَاءً فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ فَأَصْبَحْتُمْ بِنِعْمَتِهِ إِخْوَانًا وَكُنْتُمْ عَلَى شَفَا حُفْرَةٍ مِنَ النَّارِ فَأَنْقَذَكُمْ مِنْهَا كَذَلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ؛ और सभी भगवान की रस्सी (कुरान, इस्लाम और संचार के किसी भी अन्य माध्यम) को पकड़ लो, और बिखरो नहीं! और याद करो खुदा की (बड़ी) नेमत तुम पर कि तुम कैसे एक दुसरे के दुश्मन थे और उसने तुम्हारे दिलों में मोहब्बत पैदा किया और उसकी नेमतत की बरकत से तुम भाई भाई हो गए! और तुम आग के गड़हे के किनारे पर थे, तब परमेश्वर ने तुम को उस से बचाया; इस तरह ख़ुदा अपनी आयतें तुम पर नाज़िल करता है, शायद तुम हिदायत पा जाओ। (आले इमरान, 103)।
"अल्लाह की रस्सी" का अर्थ ईश्वर के शुद्ध सार के साथ संचार का कोई साधन है, चाहे इसका मतलब इस्लाम हो, या कुरान, या पैगंबर और उनका परिवार।
यह आयत एकता और भाईचारे के महान आशीर्वाद की ओर इशारा करती है और मुसलमानों को अतीत की दुखद स्थिति के बारे में सोचने के लिए आमंत्रित करती है, और उस "तितर-बितर" की तुलना इस "एकता" से करती है।
यहाँ उन्होंने विश्वासियों के दिलों को अधिकृत करने की समस्या को अपने ओर निस्बत दी और कहा: "भगवान ने आपके दिलों में सद्भाव पैदा किया है।" इस व्याख्या के साथ, वह इस्लाम के एक सामाजिक चमत्कार की बात कर रहा है, इस लिऐ अगर हम इतिहास में अतीत की अरब दुश्मनी और नफ़रत की सही जाँच करें ।
अंक
दिलों के बीच शांति का निर्माण केवल भगवान के हाथ में है। कुरान पैगंबर से कहता है: «لَوْ أَنْفَقْتَ ما فِي الْأَرْضِ جَمِيعاً ما أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ»(انفال، 63)" (अनफाल, 63)। यदि आप पृथ्वी की सारी पूंजी खर्च करते हैं, तो भी आप उसकी इच्छा के बिना दिलों के बीच संबंध स्थापित नहीं कर सकते।
विभाजन भगवान की सजा और दंड जैसा है। इसके अलावा, इस्लाम में, एकता बनाने के लिए झूठ बोलना जायज़ है, और ऐसा सच बोलना मना है जो विभाजन का कारण बनता है।
संदेशों
1- एकता और विभाजन से बचना ईश्वरीय कर्तव्य है। «وَ اعْتَصِمُوا»
2- एकता की धुरी जाति, भाषा, राष्ट्रीयता आदि नहीं, ईश्वर का धर्म होना चाहिए।و .... «بِحَبْلِ اللَّهِ»
3- इस्लाम की नेमतों और सेवाओं की उपेक्षा न करें। «إِذْ كُنْتُمْ أَعْداءً فَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِكُمْ»
4- एकता भाईचारे का कारक है। «فَأَصْبَحْتُمْ بِنِعْمَتِهِ إِخْواناً»
5- एकता ईश्वर के महान आशीर्वादों में से एक है। «فَأَصْبَحْتُمْ بِنِعْمَتِهِ»
6- फूट और दुश्मनी रसातल और आग का गड्ढा है।  «شَفا حُفْرَةٍ مِنَ النَّارِ»
7- भगवान का आशीर्वाद उसकी आयतें हैं। «وَ اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ ... يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آياتِهِ»
8- ईश्वर की कृपा का स्मरण प्रेम का कारण और मार्गदर्शन का आधार है। «وَ اذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ ... لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ»

captcha