
इकना ने अंतर्राष्ट्रीय इस्लामिक फ़िक़्ह फ़ोरम की सूचना वेबसाइट अनुसार बताया कि इस्लामिक सहयोग संगठन के महासचिव हुसैन इब्राहिम ताहा ने कतर की राजधानी दोहा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय इस्लामिक फ़िक़्ह फ़ोरम के 26वें सत्र के उद्घाटन सत्र में, इस्लामी उम्माह को समझाने और प्रबुद्ध करने के साथ-साथ निरंतर परिवर्तन और परिवर्तन से भरी दुनिया में इस्लाम के सहिष्णु मूल्यों को फैलाने में अंतर्राष्ट्रीय इस्लामिक फ़िक़्ह फ़ोरम के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने राष्ट्र का मार्गदर्शन करने तथा जीवन के विभिन्न पहलुओं में इसकी समस्याओं को सुलझाने में इस्लामी न्यायशास्त्र के महत्व पर बल दिया।
इब्राहिम ताहा ने कहा, "ऐसे सम्मेलनों में विद्वानों की भूमिका पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस्लामी मूल्यों को संरक्षित करते हुए समय के अनुरूप फतवे तैयार करने में फ़िक़्ह परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसकी शुरुआत रविवार को देश की राजधानी दोहा में इस्लामी दुनिया के विद्वानों के एक समूह की उपस्थिति और कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी की देखरेख में हुई।

ग्रैंड मस्जिद के इमाम और उपदेशक तथा इस्लामिक न्यायशास्त्र परिषद के प्रमुख शेख सालेह बिन अब्दुल्लाह बिन हमीद ने भी इस सत्र के दौरान समीक्षा और चर्चा किए जाने वाले मुद्दों के महत्व के बारे में बात की तथा इस बात पर बल दिया कि ये महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनके लिए सामूहिक इज्तिहाद की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि असेंबली काउंसिल पांच दिनों तक प्रस्तुत शोध की समीक्षा करेगी, जिसमें दुनिया भर के 60 से अधिक देशों के 230 विद्वान और विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।
इस बैठक में हमारे देश का प्रतिनिधित्व इस्लामिक संप्रदायों के निकटता मंच के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम हामिद शाहरियारी तथा विशेषज्ञों की सभा के सदस्य अयातुल्ला अहमद मोबल्लग़ी कर रहे हैं।

पांच दिनों की इस बैठक में इस्लामिक सहयोग संगठन के सदस्य देशों और विश्व भर के मुस्लिम समुदायों के लिए चिंता के समकालीन न्यायशास्त्रीय, बौद्धिक, चिकित्सा, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
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