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मिस्र के पश्चिमी प्रांत के सबसे वरिष्ठ क़ुरआन क़ारी के निधन पर वक्फ़ मंत्री का शोक संदेश

16:23 - August 04, 2026
समाचार आईडी: 3485651
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तेहरान (IQNA)मिस्र के पश्चिमी (ग़रबिया) प्रांत के सबसे वरिष्ठ क़ुरआन क़ारी शेख़ सईद अल-नज्जार के निधन पर देश के वक्फ़ मंत्री ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

इकना के अनुसार, मिस्र के वक्फ़ मंत्री उसामा अल-अज़हरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि शेख़ सईद अल-नज्जार, जो वक्फ़ मंत्रालय की क़ुरआन तिलावत परिषद के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक थे और अहमदी मस्जिद के सबसे पुराने क़ारियों में गिने जाते थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन क़ुरआन की सेवा में समर्पित किया।

शोक संदेश में कहा गया कि मरहूम शेख़ सईद अल-नज्जार मंत्रालय के एक अत्यंत निष्ठावान सदस्य थे। वे सिदी सुवैद मस्जिद (मनील अल-हुवैशात) में मुअज़्ज़िन और क़ुरआन क़ारी के रूप में सेवा करते रहे। उन्होंने अपने पीछे ईमानदारी, विनम्रता और उत्तम चरित्र की मिसाल छोड़ी। जीवन के अंतिम दिनों तक वे क़ुरआन की महफ़िलों और तिलावत सभाओं में नियमित रूप से भाग लेते रहे।

वक्फ़ मंत्री ने उनके परिवार, शिष्यों और चाहने वालों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए अल्लाह से दुआ की कि मरहूम को अपनी असीम रहमत से नवाज़े, जन्नतुल फ़िरदौस में उच्च स्थान प्रदान करे और क़ुरआन की सेवा का सर्वोत्तम प्रतिफल अता करे। साथ ही उनके परिवार और परिजनों को सब्र प्रदान करने की प्रार्थना की।

शेख़ सईद अल-नज्जार, मिस्र के ग़रबिया प्रांत के तन्ता शहर के मनील अल-हुवैशात गाँव के निवासी थे। उनका निधन 11 मुराद (1 अगस्त) को 97 वर्ष की आयु में हुआ।

वे उन प्रतिष्ठित क़ारियों और उस्तादों में शामिल थे जिन्होंने मिस्र में क़ुरआन तिलावत के स्वर्णिम दौर को देखा था। उन्हें महान क़ारी शेख़ महमूद ख़लील अल-हुसरी और शेख़ अन्तर मुस्लिम जैसी प्रसिद्ध हस्तियों का समकालीन और निकट सहयोगी होने का सम्मान प्राप्त था।

क़ुरआन की सेवा में शानदार योगदान

शेख़ सईद अल-नज्जार का क़ुरआनी सफ़र कई दशकों तक फैला रहा। इस दौरान उन्होंने मुअज़्ज़िन के रूप में सेवा की और मनील अल-हुवैशात की सिदी सुवैद मस्जिद में नियमित रूप से क़ुरआन की तिलावत की ज़िम्मेदारी निभाई। उन्होंने इस दायित्व को पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ निभाया।

उनका जीवन ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा रहा जो उनके धार्मिक समर्पण को दर्शाते हैं। जीवन के अंतिम क्षणों तक वे विद्यार्थियों और क़ुरआन से प्रेम करने वालों के बीच सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

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