इकना के अनुसार, कर्बला अल-आन की रिपोर्ट में यासिर अल-ताई, जो दारुल क़ुरआन अल-करीम के शिक्षक हैं, ने बताया कि यह कार्यक्रम नजफ़ हौज़ा-ए-इल्मिया के सहयोग से ‘या हुसैन’ मार्ग पर स्थित इमाम हसन मुज्तबा (अ.) ज़ायरीन टाउन में आयोजित किया गया है।
उन्होंने बताया कि इन स्टेशनों का उद्देश्य क़ुरआनी संस्कृति को बढ़ावा देना, ज़ायरीन की क़िराअत (पाठ) में सुधार करना, अरबईन के अवसर का उपयोग क़ुरआनी मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए करना तथा श्रद्धालुओं को निःशुल्क क़ुरआनी सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
इन केंद्रों पर अनेक प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ व्यक्तिगत सत्र, जिनमें नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सूरह अल-फ़ातिहा और सूरह अल-इख़लास की सही तिलावत सिखाई जाती है।
दारुल क़ुरआन के क़ारियों की उपस्थिति में दैनिक क़ुरआनी महफ़िलें।
छोटे बच्चों की क़ुरआन याद करने और तिलावत की प्रतिभा को प्रदर्शित करने के विशेष कार्यक्रम।
त्वरित क़ुरआनी प्रतियोगिताएँ और प्रश्नोत्तरी, जिनमें प्रतिभागियों को बरकत वाली (तबर्रुक) भेंटें दी जाती हैं।
क़ुरआनी आयतों पर आधारित अरबी सुलेख (कैलिग्राफी) प्रदर्शनी।
बच्चों के लिए छोटी-छोटी सूरहों की शिक्षा का विशेष कार्यक्रम।
ज़ायरीन के क़ुरआन संबंधी प्रश्नों के उत्तर देने की व्यवस्था।
यासिर अल-ताई ने कहा कि इन क़ुरआनी स्टेशनों पर ज़ायरीन की बड़ी संख्या में उपस्थिति और उत्साह देखने को मिला। उन्होंने बताया कि विभिन्न अरब और अन्य देशों से आए धार्मिक प्रतिनिधिमंडलों ने भी इसमें भाग लिया।
उन्होंने कहा कि यह सहभागिता अरबईन के अवसर पर क़ुरआन के संदेश की एकता, सार्वभौमिकता और वैश्विक स्वरूप को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि ऐसे क़ुरआनी केंद्र ज़ायरीन की सेवा और उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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