अरबईन की महान पदयात्रा इस्लामी दुनिया का सबसे बड़ा जनसमागम है, जहाँ हर वर्ष भाईचारे, त्याग और इमाम हुसैन (अ.स.) के ज़ायरीन की निस्वार्थ सेवा का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। इस यात्रा में ख़ुज़ेस्तान प्रांत, जो इराक जाने वाले ज़ायरीन का प्रमुख प्रवेश द्वार है, लाखों अहलेबैत (अ.स.) प्रेमियों की मेज़बानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सामान्य सेवा सुविधाओं के साथ-साथ क़ुरआनी मोकिब भी जनसंस्थाओं की क्षमता का उपयोग करते हुए अरबईन के मार्ग को क़ुरआन और अहलेबैत (अ.स.) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना रहे हैं।
इकना से बातचीत में सैयदा मरयम मूसवीज़ादेह ने बताया कि अरबईन केवल एक विशाल जनसमूह नहीं है, बल्कि क़ुरआन और अहलेबैत (अ.स.) की शिक्षाओं के प्रसार का एक दुर्लभ अवसर भी है। इसी कारण इस वर्ष सांस्कृतिक और क़ुरआनी कार्यक्रमों को अधिक संगठित और उद्देश्यपूर्ण बनाया गया है, ताकि ज़ायरीन सामान्य सेवाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक वातावरण का भी लाभ उठा सकें।
उन्होंने शलमचा सीमा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अनेक ज़ायरीन की इराक यात्रा का पहला पड़ाव है। इसलिए इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत क़ुरआन की खुशबू और उसके नूर के साथ होनी चाहिए।
उन्होंने ख़ुर्रमशहर के "नूरुल-हादी" क़ुरआनी मोकिब को इस प्रयास का एक सफल उदाहरण बताया।
मूसवीज़ादेह ने कहा कि आज अरबईन के मार्ग, विशेषकर शलमचा सीमा पर जो दृश्य दिखाई देता है, वह केवल साधारण सेवा नहीं है, बल्कि कुशल प्रबंधन, जनसहभागिता और क़ुरआनी गतिविधियों का एक सफल मॉडल है। यह दर्शाता है कि जब सुव्यवस्थित प्रबंधन, सांस्कृतिक दृष्टिकोण और क़ुरआनी शिक्षाएँ एक साथ आती हैं, तो ज़ायरीन की सेवा केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं रहती, बल्कि एक स्थायी इबादत और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाला सांस्कृतिक अभियान बन जाती है।
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