इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्रालय के क़ुरआन अनुवाद एवं प्रकाशन केंद्र में किया गया, जिसमें ईरान, मलेशिया और मिस्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जहाँगीरी ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय क़ुरआन प्रदर्शनी, क़ुरआनिक साइंसेज़ एंड नॉलेज विश्वविद्यालय, तथा क़ुरआनी अध्ययन से जुड़े विभिन्न विश्वविद्यालयों, संकायों और शैक्षणिक संस्थानों का परिचय देते हुए बताया कि ईरान इस क्षेत्र में अध्ययन और शोध के इच्छुक विद्यार्थियों तथा शोधकर्ताओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है।
उन्होंने क़ुरआनी शिक्षा और अनुसंधान में हौज़ा-ए-इल्मिया (इस्लामी धार्मिक शिक्षण संस्थानों) की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला और बताया कि ये संस्थान क़ुरआन के शोधकर्ताओं और व्याख्याकारों (मुफस्सिरों) के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इसके अलावा उन्होंने क़ुरआनी अध्ययन से संबंधित शोध-पत्रिकाओं, क़ुरआन के मुद्रण, प्रकाशन और अनुवाद केंद्रों, तथा ईरान की उन सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों का भी परिचय कराया जो क़ुरआनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इन सभी को अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन और अनुसंधान के महत्वपूर्ण अवसर बताया।
इस कार्यक्रम में ईरान, मलेशिया और मिस्र के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों में क़ुरआनी अध्ययन और गतिविधियों से जुड़ी शैक्षणिक उपलब्धियों, क्षमताओं और अध्ययन के अवसरों का भी परिचय प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
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