IQNA

नाइजीरिया के शिया आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य:

अरबईन की ज़ियारत विश्व में शांति के प्रसार के लिए एकता का प्रतीक है

12:14 - August 05, 2026
समाचार आईडी: 3485660
1
तेहरान (IQNA)नाइजीरिया के इस्लामी शिया आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य और शेख इब्राहीम ज़कज़की के शिष्य शेख याक़ूब याह्या कात्सीना ने कहा कि अरबईन की ज़ियारत विश्व में शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने वाली एकता और जन-कूटनीति (Public Diplomacy) का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता, नस्लवाद और अन्य वैश्विक चुनौतियों से भरे इस दौर में यह आध्यात्मिक आयोजन मानवता के बीच सद्भाव, सहयोग और आपसी समझ को मज़बूत करता है।

अरबईन के अवसर पर दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने अरबईन की ज़ियारत के दर्शन, उसके महत्व तथा विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और देशों के लोगों की भागीदारी पर विस्तार से प्रकाश डाला।


प्रश्न: आपके विचार में अरबईन के सबसे महत्वपूर्ण आचरण (आदाब) क्या हैं?


शेख कात्सीना ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने नाना की उम्मत में सुधार लाने के लिए क़ियाम किया था। यह सुधार केवल राजनीतिक परिवर्तन तक सीमित नहीं था। इसलिए ज़ायरीन को इस यात्रा के दौरान इस्लामी नैतिकता का पालन करना चाहिए तथा सब्र, ईमान, इख़लास (निष्ठा), त्याग और बलिदान की भावना अपनाते हुए इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि ज़ायरीन को सत्य बोलना, अमानतदारी निभाना, समय पर नमाज़ अदा करना और अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, चाहे उनका धर्म, जाति या रंग कोई भी हो। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) पूरी मानवता के हैं और उनका प्रेम लोगों को एकजुट करता है। साथ ही महिलाओं, बच्चों और यहाँ तक कि जानवरों जैसे कमजोर और असहाय प्राणियों के प्रति दया और करुणा दिखाना भी अत्यंत आवश्यक है।


प्रश्न: विभिन्न इस्लामी मतों और उम्मत की एकता में अरबईन की क्या भूमिका है?


उन्होंने उत्तर दिया कि हुसैनी आयोजनों, विशेषकर अरबईन की पदयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और विचारधाराओं के लोगों के बीच एकता स्थापित करना है।


प्रश्न: क्या विभिन्न धर्मों और देशों के लोगों की अरबईन में भागीदारी को विश्व में शांति की संस्कृति फैलाने वाली "जन-कूटनीति" कहा जा सकता है?


शेख कात्सीना ने कहा कि अरबईन की ज़ियारत वास्तव में जन-कूटनीति का एक प्रभावशाली माध्यम है, जो सांप्रदायिकता, नस्लवाद और हथियारों की होड़ जैसी चुनौतियों से जूझ रही दुनिया में शांति और भाईचारे का संदेश देती है।


उन्होंने कहा कि हर वर्ष करबला, नजफ़ और अन्य पवित्र स्थलों पर लाखों लोग एकत्र होते हैं, लेकिन इतनी विशाल भीड़ के बावजूद झगड़े, चोरी या भ्रष्टाचार जैसी घटनाएँ बहुत कम देखने या सुनने को मिलती हैं। यह इस्लाम के उस अंतिम उद्देश्य के अनुरूप है, जिसमें पूरी मानवता को शांति, सद्भाव और आपसी समझ पर आधारित एक परिवार बनाने की शिक्षा दी गई है।


उन्होंने अंत में इमाम रज़ा (अ.स.) का यह कथन उद्धृत किया:«"यदि लोग हमारी बातों की सुंदरता को समझ लें, तो वे निश्चित रूप से हमारा अनुसरण करेंगे।


4367395

captcha