यह कार्यक्रम ग़ज़ा के औक़ाफ़ विभाग ने IHH (इंसानी राहत फाउंडेशन) के सहयोग से आयोजित किया। इसमें महिला क़ुरआन हिफ़्ज़ संस्थान "दीवान अल-हाफ़िज़ात" की 110 छात्राओं द्वारा पूरे क़ुरआन के हिफ़्ज़ की पूर्णता का उत्सव मनाया गया।
यह आयोजन "तरातील अल-तमकीन" नामक क़ुरआनी दिवस का हिस्सा था, जिसे ग़ज़ा के औक़ाफ़ एवं धार्मिक मामलों के मंत्रालय द्वारा आयोजित हिफ़्ज़ से क़ुरआन मुकम्मल करने की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किया गया।
ग़ज़ा के औक़ाफ़ मंत्रालय के क़ुरआन एवं सुन्नत विभाग के महानिदेशक मुहम्मद सालेम ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार छात्राओं ने एक ही बैठक में पूरा क़ुरआन हिफ़्ज़ से मुकम्मल किया, जो ग़ज़ा और उसके लोगों के लिए गर्व और सम्मान का स्रोत है।
उन्होंने "दीवान अल-हाफ़िज़ात" का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस संस्थान ने ऐसा क़ुरआनी वातावरण उपलब्ध कराया, जहाँ छात्राएँ अपना समय अल्लाह की किताब की सेवा और अध्ययन में समर्पित कर सकीं।
वहीं ग़ज़ा के औक़ाफ़ निदेशक असअद मुश्तही ने भी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि युद्ध और विनाश के बीच भी छात्राओं का क़ुरआन को याद करना और उसकी तिलावत जारी रखना पूरी दुनिया को यह संदेश देता है कि ग़ज़ा के लोग हर कठिन परिस्थिति में भी अल्लाह की किताब से अपना संबंध मज़बूती से बनाए हुए हैं।
ग़ौरतलब है कि इज़राइल के साथ जारी युद्ध के बावजूद ग़ज़ा में इस प्रकार के क़ुरआनी कार्यक्रम पहले भी आयोजित होते रहे हैं। इससे पहले नुसैरात शरणार्थी शिविर स्थित सैय्यद क़ुत्ब मस्जिद में 105 हाफ़िज़ छात्रों ने भी एक ही बैठक में पूरा क़ुरआन हिफ़्ज़ से मुकम्मल किया था।
कार्यक्रम के आयोजकों और प्रतिभागियों ने इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस क़ुरआनी अभियान को जारी रखने का संकल्प दोहराया।
4367789