अंतर्राष्ट्रीय कुरान समाचार एजेंसी (IQNA) वेबसाइट "अल-फतह" के अनुसार, शेख "यूसुफ अल क़रज़ावी ", मुस्लिम विद्वानों के अंतर्राष्ट्रीय संघ के अध्यक्ष ने, पिछले कुछ वर्षों से इस्लामी स्कूलों की निकटता के लिए प्रयास पर खेद व्यक्त करते हुऐ, कहा कि शिया और सुन्नी के बीच निकटता बेफ़यदा है।
उन्होंने कहा: सुन्नी और शिया के बीच सन्निकटन, सुन्नियों के उन्मूलन के लिए मार्ग प्रशस्त और शियाओं के लाभ के लिए है।
यूसुफ अल क़रज़ावी ने अपनी शिया विरोधी टिप्पणी में कहा कि शिया लोग सुन्नियों को ख़त्म कर डालेंगे।
उन्हों ने "नसरल्लाह" जैसी हस्ती प्रमुख लेबनान हिजबुल्लाह के महासचिव पर हमला किया, और उनको "शैतान का गरोह" कहा।
क़रज़ावी ने सऊदी विद्वानों की प्रशंसा करते हुऐ बल दिया कि सऊदी अरब के विद्वान हमसे ज़्यादा समझदार हैं और शियों "विधर्मियों" और (काफिर) के बारे में पता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि शिया लोग सन्निकटन जैसी गतिविधियों के माध्यम से चाहते हैं कि इस तरह सुन्नियों को अपना खिलौना बनालें।
यूसुफ अल क़रज़ावी ने और कहा:सुन्नी लोगों ने सन्निकटन के प्रयासों से कुछ नहीं हासिल किया और शिया पैगंबर (PBUH) के साथियों की तक्फ़ीर करते हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कई शिया उलमा और मराजेअ कराम जैसे क्रांति के सर्वोच्च नेता ने पैगंबर (PBUH) की पत्नियों और साथियों के किसी भी तरह के अपमान को हराम होने का स्पष्ट फतवा जारी किया है।
इसी तरह सुन्नी और शिया के बीच सन्निकटन औरर मुसल्मानों के बीच ऐकता पैदा करना इस्लामी गण्यराज्य ईरान के उद्देश्यों में गिना जाता है कि इसस को वजूद में लने के लिऐ कई संगठनों की भी स्थापना की गई है और बहुत से सुन्नी प्रमूख उलमा भी सदस्य हैं