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कुरान का ज्ञान /4

आत्महत्या से बचने के लिए कुरान के मशवरे

15:08 - November 21, 2022
समाचार आईडी: 3478122
तेहरान (IQNA):"विश्व स्वास्थ्य संगठन" (WHO) के सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में हर साल लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या से मरते हैं। साथ ही, हर साल 16 मिलियन लोगों के मन में "आत्मघाती विचार" आते हैं, लेकिन मुस्लिम समाजों में यह आँकड़ा बहुत अलग है।

"विश्व स्वास्थ्य संगठन" (WHO) के सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में हर साल लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या से मरते हैं। साथ ही, हर साल 16 मिलियन लोगों के मन में "आत्मघाती विचार" आते हैं, लेकिन मुस्लिम समाजों में यह आँकड़ा बहुत अलग है।

आदाद व शुमार बताते हैं कि आत्महत्या के प्रयासों की संख्या जो मृत्यु का कारण नहीं बनती है, उन मामलों की संख्या से 20 गुना अधिक है जो मृत्यु का कारण बनते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में हर साल 16 मिलियन लोगों को "आत्मघाती विचार" आते हैं। इस तरह हर साल विश्व के लगभग 0.01% लोग आत्महत्या से मरते हैं लेकिन दुनिया के करीब 0.2% लोग सुसाइड के लिए तैयार हो जाते हैं।

 

यह संख्या बहुत बड़ी है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार आत्महत्या की घटना से निपटने के लिए तीन चरण महत्वपूर्ण हैं:

1. ऐसी हरकत करने के बारे में चेतावनी देनी चाहिए।

2. उन लोगों की देखभाल करना जिनमें आत्महत्या करने की ख्वाहिश है और उन्हें आशा देने की कोशिश करें और उनकी निराशा को दूर करें और उनके साथ प्यार और दया का व्यवहार करें।

3. आत्महत्या करने वाले लोगों के लिए कड़ी सजा पर विचार किया जाना चाहिए।

आत्महत्या रोकने के कुरानी उपाय 

कुरान में बताए गए आत्महत्या रोकथाम के उपाय भी यही हैं। यानी अल्लाह ने आत्महत्या के बारे में चेतावनी दी है और इसके लिए गंभीर कार्रवाई और दंड निर्धारित किया है।

जहाँ खुदा सूरए निसा की आयत 29 और 30 में कहता है: 

«وَلَا تَقْتُلُوا أَنْفُسَكُمْ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا * وَمَنْ يَفْعَلْ ذَلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا وَكَانَ ذَلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا: 

आत्महत्या मत करो; क्योंकि अल्लाह तुम पर सदा मेहरबान है, और जो कोई [अल्लाह की सीमाओं के] उल्लंघन और अत्याचार [स्वयं पर और दूसरों पर] के कारण, ऐसा करेगा हम जल्दी ही उसे [दुःख देनेवाली और जलनेवाली] आग में झोंक देंगे; और यह अल्लाह के लिए आसान है।"

इन आयतों में, अल्लाह ने आत्महत्या से बचने के लिए उपचार के तीन चरणों का वर्णन किया है; सबसे पहले, जहां यह कहता है: «وَلَا تَقْتُلُوا أَنْفُسَكُمْ» और इस तरह यह आत्महत्या की चेतावनी देता है। दूसरा, जब अल्लाह कहता है: «إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا» और यह उस व्यक्ति की निराशा का मनोवैज्ञानिक इलाज है जो आत्महत्या के बारे में सोच रहा है; अल्लाह कहता है कि उसकी दया में उनको शामिल है और जब अल्लाह कहता है: «فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا» इसने एक बहुत ही गंभीर और सख़्त सजा बनाई है।

 

कुरान में आत्महत्या से ग़फ़लत नहीं की गई है, बल्कि इसके खिलाफ चेतावनी दी गई है और इसके लिए उचित उपचार प्रदान किया गया है। इससे इस्लामिक देशों में आत्महत्या की दर कम से कम हो गई है, जो कि एक हजार में 1 से भी कम है।

डॉ. जोस मैनुअल और एलेसेंड्रा फ्लीशमैन, दो तहक़ीक़ कारों ने अपने संयुक्त तहक़ीक़ के दौरान जोर दिया: इस्लामिक देशों में आत्महत्या की दर (अन्य सभी देशों के विपरीत) शून्य के करीब है (हजारों में एक से भी कम) और इसका कारण यह है कि इस्लाम आत्महत्या से मना करता है।

 

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