तेहरान (IQNA)एक नए अध्ययन के अनुसार, अमेरिका के मिशिगन राज्य में मुस्लिम डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल सैयद की प्राइमरी चुनाव में जीत के बाद उनके खिलाफ़ इस्लामोफोबिक और नफ़रत फैलाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट में लगभग 20 गुना वृद्धि हुई।
इकना रिपोर्ट के अनुसार, जीत के कुछ ही घंटों बाद अब्दुल सैयद के नाम से जुड़ी इस्लाम-विरोधी सामग्री में तेज़ उछाल देखा गया।
रोज़ाना 3,099 पोस्ट
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज़्ड हेट (CSOH) के नए विश्लेषण के मुताबिक, सैयद की जीत के बाद वाले सप्ताह में उन्हें निशाना बनाने वाली इस्लामोफोबिक पोस्टों की औसत संख्या रोज़ाना 3,099 रही। चुनाव से पहले के दो महीनों में यह औसत केवल 155 पोस्ट प्रतिदिन था।
इस तरह पोस्टों में लगभग 1,895 प्रतिशत की वृद्धि हुई, यानी करीब 20 गुना उछाल।
5 अगस्त, जिस दिन उनके प्रतिद्वंद्वी ने अपनी हार स्वीकार की, पोस्टों की संख्या लगभग 7,000 एक दिन तक पहुंच गई।
किस तरह की बातें फैलाई गईं?
CSOH ने X, Facebook, Instagram, YouTube, Reddit और Bluesky पर मौजूद पोस्टों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इनमें वास्तविक राजनीतिक आलोचना की तुलना में बार-बार दोहराए जाने वाले षड्यंत्रकारी और इस्लामोफोबिक दावे अधिक दिखाई दिए।
सबसे प्रमुख दावों में सैयद को हमास, हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से जोड़ना शामिल था। कुछ व्यापक रूप से साझा की गई पोस्टों में उन्हें “जिहादी” तक कहा गया।
अन्य पोस्टों में उन पर अमेरिका में शरिया कानून लागू करने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया। कुछ पोस्टों ने इससे भी आगे बढ़कर पश्चिमी देशों से मुसलमानों को पूरी तरह बाहर निकालने की मांग की।
X पर भी इस्लाम-विरोधी पोस्टों में रिकॉर्ड उछाल
5 अगस्त को X पर सामान्य इस्लामोफोबिक पोस्टों की संख्या लगभग 12,000 तक पहुंच गई। यह पिछले 30 दिनों के औसत से दोगुने से भी अधिक थी और पहली बार एक दिन में यह संख्या 10,000 के पार गई।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, छह दिन बाद भी यह वृद्धि पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली इस्लाम-विरोधी पोस्टों का स्तर प्राइमरी चुनाव से पहले के स्तर से 59 प्रतिशत अधिक था, जबकि विशेष रूप से अब्दुल सैयद को निशाना बनाने वाली अपमानजनक पोस्टें शुरुआती गर्मियों की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक थीं।
2026 के मध्यावधि चुनाव को लेकर चिंता
CSOH ने इस ऑनलाइन उछाल को एक व्यापक और संगठित अभियान से जोड़ा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस अभियान में “ग्रेट रिप्लेसमेंट” जैसी साजिशी धारणाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और मध्य-पूर्व के युद्ध तथा मुस्लिम उम्मीदवारों की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी जैसी घटनाओं के दौरान इसकी तीव्रता बढ़ रही है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब यह मामला केवल एक उम्मीदवार के खिलाफ़ प्रतिक्रिया जैसा नहीं दिखता, बल्कि ऐसा पैटर्न बनता जा रहा है जो किसी मुस्लिम राजनेता के चुनाव जीतने या महत्वपूर्ण पद हासिल करने पर दोहराया जाता है।
CSOH ने चेतावनी दी है कि 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए चुनावी अभियान तेज़ होने के साथ मुस्लिम-विरोधी पूर्वाग्रह और ऑनलाइन नफ़रत की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है।
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