IQNA

10:33 - August 15, 2026
समाचार आईडी: 3485700
पवित्र क़ुरआन की बेअदबी के विरुद्ध यमन के लोगों का विशाल प्रदर्शन

तेहरान (IQNA)यमन के शहर ज़मार में पवित्र क़ुरआन के प्रति कथित ज़ायोनी-अमेरिकी अपमानजनक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करने के लिए एक विशाल जनसभा आयोजित की गई।

इक़ना ने अंसारुल्लाह की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसारबताया कि यमन के ज़मार शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर क़ुरआन-ए-करीम के प्रति बार-बार की जाने वाली अमेरिकी-ज़ायोनी कथित बेअदबी की निंदा और उसका विरोध किया।

इक़ना ने अंसारुल्लाह की वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसारबताया कि यमन के ज़मार शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर क़ुरआन-ए-करीम के प्रति बार-बार की जाने वाली अमेरिकी-ज़ायोनी कथित बेअदबी की निंदा और उसका विरोध किया।

इस प्रदर्शन में कार्यकारी एवं स्थानीय अधिकारियों तथा सामाजिक हस्तियों के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने उन तत्वों की कार्रवाइयों की निंदा की जो इज़रायल से जुड़े बताए गए हैं और जिन्होंने ऐसा उकसावे वाला कृत्य किया, जिससे दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि अल्लाह की किताब का अपमान धार्मिक पवित्रताओं का खुला उल्लंघन और इस्लामी पवित्र स्थलों के प्रति स्पष्ट आक्रमण है।

प्रदर्शन के दौरान जारी बयान में कहा गया कि क़ुरआन-ए-करीम के प्रति हालिया अमेरिकी-ज़ायोनी कथित अपमान, इस्लाम और मुसलमानों के विरुद्ध ज़ायोनी आंदोलन तथा उसके समर्थकों द्वारा चलाए जा रहे संगठित और खुले शत्रुतापूर्ण अभियानों का हिस्सा है।

बयान के एक अन्य हिस्से में कहा गया कि ये कार्रवाइयां पश्चिम में मौजूद सहयोगियों के साथ मिलकर ज़ायोनी योजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हैं, जिसका मुख्य निशाना मुस्लिम उम्मत है और जो पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा है।

बयान में इन कथित ज़ायोनी-अमेरिकी कार्रवाइयों की कड़े शब्दों में निंदा की गई और इन्हें पवित्र क़ुरआन के विरुद्ध जारी हमलों की श्रृंखला का हिस्सा बताया गया। बयान के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयां क़ुरआन-ए-करीम तथा उसमें निहित मूल्यों, सिद्धांतों और नैतिक शिक्षाओं के प्रति स्पष्ट शत्रुता को दर्शाती हैं।

बयान में यमन के लोगों की क़ुरआन-ए-करीम और उसकी दृढ़ शिक्षाओं के प्रति प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया गया। साथ ही फ़िलिस्तीन के अधिकारों के समर्थन, वैश्विक साम्राज्यवादी शक्तियों के प्रभुत्व से मुक्ति तथा स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई, ताकि आक्रमण, घेराबंदी और कब्ज़े का अंत किया जा सके।

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