IQNA

20:41 - August 15, 2026
समाचार आईडी: 3485705
पैग़म्बर (अ.) की ज़िंदगी से सीख

लोगों के अधिकार अदा किए बिना कोई रास्ता नहीं

तेहरान (IQNA) पैग़म्बर-ए-अकरम (अ.) ने लोगों के अधिकार अदा करने और उनसे माफ़ी माँगने का इतना स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया कि उन लोगों के लिए भी किसी तरह का बहाना या तर्क बाकी नहीं रहता जो दूसरों के अधिकार अदा करने में लापरवाही करते हैं। आपने अपने व्यवहार के माध्यम से सब पर हुज्जत पूरी कर दी।

हज्जतुल-इस्लाम अलीरज़ा क़बादी, समाजशास्त्री और धार्मिक विशेषज्ञ, अपने लेखों की एक श्रृंखला में पैग़म्बर-ए-अकरम (अ.)  की ज़िंदगी के उन पहलुओं का नए और व्यावहारिक दृष्टिकोण से अध्ययन करते हैं, जिन पर कम ध्यान दिया गया है।

पैग़म्बर (अ.)  अपने जीवन के अंतिम दिनों में 14 दिनों तक बीमार रहे। बीमारी के दौरान एक दिन हज़रत अली (अ.) और फ़ज़्ल बिन अब्बास की सहायता से मस्जिद में आए। आपने लोगों को अपनी मृत्यु के निकट होने की सूचना देते हुए फ़रमाया:

“यदि मैंने किसी से कोई वादा किया है तो वह बताए, ताकि मैं उसे पूरा कर दूँ; और यदि किसी का कोई अधिकार या क़र्ज़ मेरे ज़िम्मे है तो वह बताए, ताकि मैं उसे अदा कर दूँ।”

वफ़ात से तीन दिन पहले, अत्यधिक बीमारी की अवस्था में भी आप दोबारा मस्जिद में आए और लोगों से फ़रमाया:

“जिसका कोई अधिकार मेरे ज़िम्मे है, वह खड़ा होकर उसे बताए; क्योंकि इस दुनिया में बदला लेना क़यामत के दिन बदला लेने से आसान है।”

उस समय सवादह नामक व्यक्ति खड़े हुए और उन्होंने कहा कि ताइफ़ की लड़ाई से लौटते समय जब आपने अपनी सवारी को चाबुक मारना चाहा तो वह चाबुक उनके शरीर पर लगा था। अब वे उस चोट का बदला लेना चाहते हैं।

पैग़म्बर ﷺ ने आदेश दिया कि वही चाबुक घर से लाया जाए, ताकि बदला लिया जा सके। फिर आपने अपनी कमीज़ ऊपर की और स्वयं को क़िसास के लिए तैयार कर लिया।

जब सवादह ने पैग़म्बर ﷺ के पवित्र शरीर को देखा तो वे झुक गए और आपके पेट को चूम लिया। उस समय पैग़म्बर ﷺ ने उनके लिए दुआ की और फ़रमाया:

“ऐ अल्लाह! जिस प्रकार उसने अपने पैग़म्बर को माफ़ कर दिया, तू भी उसे माफ़ कर दे।

जब पैग़म्बर(अ.) जैसे महान और उच्च स्थान वाले व्यक्ति, जिन्हें जन्नत की शुभ सूचना दी जा चुकी थी, लोगों के अधिकारों को—चाहे वे लोग मुसलमान हों या गैर-मुस्लिम—अदा करने और उनसे माफ़ी माँगने की इतनी चिंता करते थे, तो दूसरे लोग लोगों के अधिकार अदा न करने के लिए अल्लाह की बारगाह में क्या बहाना पेश कर सकते हैं?

इंसान एक ओर पैग़म्बर ﷺ की पैरवी का दावा करे और दूसरी ओर किसी व्यक्ति का अधिकार अपने ज़िम्मे रखे तथा उससे माफ़ी भी न माँगे—यह कैसे संभव है?

ऐसा लगता है कि पैग़म्बर (अ.)  ने लोगों के अधिकार अदा करके और उनसे माफ़ी माँगकर उन सभी लोगों के लिए हर प्रकार के बहाने और तर्क का रास्ता बंद कर दिया जो दूसरों के अधिकार अदा करने में लापरवाही करते हैं। अपने इस व्यवहार के माध्यम से आपने सब पर हुज्जत पूरी कर दी।

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