IQNA

20:42 - August 15, 2026
समाचार आईडी: 3485706

स्वीडन में क़ुरआन की बार-बार बेअदबी

तेहरान (IQNA) कल सुबह स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम की जामा मस्जिद के बाहर परिसर में क़ुरआन-ए-करीम की एक प्रति की तीसरी बार बेअदबी की गई। दिसंबर 2025 से अब तक इस तरह की यह तीसरी घटना बताई गई है।

इकना ने अल-कुम्बस के अनुसार बताया कि  स्टॉकहोम की जामा मस्जिद के इमाम और निदेशक महमूद अल-ख़लफ़ी ने बताया कि शुक्रवार, 14 अगस्त, की सुबह मस्जिद के बाहरी परिसर में क़ुरआन-ए-करीम की एक प्रति के साथ दोबारा बेअदबी की गई। दिसंबर 2025 के बाद यह इस प्रकार की तीसरी घटना है।

अल-ख़लफ़ी ने फेसबुक पर एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें क़ुरआन-ए-करीम की एक प्रति दिखाई गई। उसकी जिल्द में छेद किए गए थे और उसे ज़ंजीर तथा ताले के ज़रिए मस्जिद के बाहर लगी रेलिंग से लटकाया गया था।

मस्जिद के इमाम: इस्लाम-विरोधी हमले बार-बार हो रहे हैं

अल-ख़लफ़ी ने बताया कि यह घटना लगभग सुबह 11 बजे हुई। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद के सामने क़ुरआन-ए-करीम के ख़िलाफ़ किए जा रहे लगातार हमलों की एक कड़ी है।

उन्होंने कहा कि उनके विचार में इन घटनाओं का उद्देश्य क़ुरआन-ए-करीम का अपमान करना, मुसलमानों को डराना और उनके ख़िलाफ़ नफ़रत को बढ़ावा देना है।

उन्होंने आगे कहा कि ये घटनाएँ अब अलग-अलग और छिटपुट घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि स्वीडन में मुसलमानों के ख़िलाफ़ बढ़ती हुई नस्लवादी और भड़काऊ बयानबाज़ी के साथ सामने आ रही हैं।

अल-ख़लफ़ी ने स्वीडन के अधिकारियों और समाज से अपील की कि वे इन हमलों के ख़िलाफ़ स्पष्ट रुख अपनाएँ। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे कृत्यों का विरोध केवल मुसलमानों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि सह-अस्तित्व, पारस्परिक सम्मान, नस्लवाद के विरोध तथा धार्मिक नफ़रत फैलाने की रोकथाम जैसे मूल्यों की रक्षा करना भी है।

पुलिस की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं

अब तक पुलिस की ओर से इस घटना के विवरण या इसके पीछे शामिल व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करने वाली कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि स्वीडन में अति-दक्षिणपंथी राजनीतिक समूह क़ुरआन की बेअदबी और उसे जलाने जैसी कार्रवाइयों के माध्यम से मुसलमानों को अपमानित करने की मुहिम चला रहे हैं। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य देश की मौजूदा समस्याओं के लिए मुसलमानों की मौजूदगी को ज़िम्मेदार ठहराना और मुस्लिम प्रवास को कम करना तथा मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने वाला माहौल पैदा करना है।

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