तेहरान (IQNA) ब्रिटेन में अभूतपूर्व सूखे और पानी की गंभीर कमी के बीच, जो कृषि और पर्यावरण के लिए खतरा बन रही है, मुस्लिम विद्वानों ने देशभर की मस्जिदों के इमामों और नमाज़ियों से “नमाज़-ए-इस्तिसक़ा” (बारिश के लिए विशेष नमाज़) की सुन्नत को पुनर्जीवित करने की अपील की है।
इकना ने ब्रिटेन में अल-अरब रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लैंड इस वर्ष बेहद शुष्क गर्मी का सामना कर रहा है। अधिकारियों ने बताया है कि देश की लगभग 71.3 प्रतिशत भूमि सूखे से प्रभावित है और लाखों लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहाँ पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियाँ लागू की गई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, बहुत कम बारिश और तापमान में भारी वृद्धि के कारण इंग्लैंड ने लगभग 190 वर्षों में अपना सबसे सूखा जुलाई देखा। इसके परिणामस्वरूप नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर कम हो गया है तथा पानी के उपयोग पर विभिन्न प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इस संकट के मद्देनज़र मुस्लिम विद्वानों ने मस्जिदों के इमामों से अपील की है कि 16 अगस्त से पूरे ब्रिटेन में नमाज़-ए-इस्तिसक़ा अदा की जाए, जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बों में बारिश के लिए दुआ को शामिल किया जाए और संभव हो तो खुले स्थानों में यह नमाज़ अदा की जाए।
विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि सूखे का मुकाबला केवल आध्यात्मिक स्तर पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार की पानी बचाने की अपील के अनुरूप पानी की बर्बादी से बचना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस संकट के समय इंसान को अपनी व्यावहारिक ज़िम्मेदारी निभाने, पर्यावरण की रक्षा करने और अल्लाह के सामने विनम्रता अपनाने की आवश्यकता है। उम्मीद है कि बारिश फिर शुरू होगी और जल संसाधनों तथा कृषि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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