तेहरान (IQNA) इस्तांबुल में आयोजित 11वें अंतरराष्ट्रीय अरबी पुस्तक मेले के अवसर पर दुनिया के विभिन्न देशों के उलमा, क़ारियों और कुरआनी विद्वानों ने “विश्व कुरआन महासंघ” (World Qur’an Council) की स्थापना की घोषणा की।
इक़ना ने अनातुली समाचार एजेंसी के हवाले से बताया कि इस्तांबुल का 11वाँ अंतरराष्ट्रीय अरबी पुस्तक मेला 15 अगस्त को शुरू हुआ और 23 अगस्त तक “कहानी जारी है, के नारे के साथ आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को अनादोलु समाचार एजेंसी का मीडिया सहयोग भी प्राप्त है।
प्रदर्शनी के पहले दिन एक विशेष बैठक में महासंघ की संस्थापक समिति ने इसकी स्थापना की घोषणा करते हुए कहा कि दुनिया भर के कुरआनी संस्थानों, केंद्रों, तिलावत मंडलियों और कुरआन अकादमियों के लिए पंजीकरण का मंच भी शुरू किया गया है।
संस्थापक समिति के बयान में कहा गया कि इस्तांबुल से इस महासंघ की स्थापना की घोषणा कुरआनी गतिविधियों के संस्थागत इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। इस विचार की शुरुआत मस्जिदे अक़्सा और क़ुद्स से हुई थी।
इस पहल के पीछे एक सरल लेकिन गहरा सवाल था: अगर दुनिया भर में कुरआन से जुड़े लोग एक-दूसरे को जानें तो क्या होगा? यदि हजारों ऐसे संस्थान, जो एक ही किताब की सेवा कर रहे हैं और एक ही संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन अक्सर एक-दूसरे से परिचित नहीं हैं, आपस में जुड़ जाएँ तो क्या होगा?
इस विचार का उद्देश्य बिखरे हुए अनुभवों को साझा शक्ति, व्यक्तिगत पहलों को वैश्विक परियोजनाओं और अलग-अलग प्रयासों को एक ऐसे एकीकृत नेटवर्क में बदलना है, जो मिलकर अल्लाह की किताब की सेवा करे।
किसी संस्था का विकल्प नहीं
बयान में स्पष्ट किया गया कि विश्व कुरआन महासंघ किसी “सुपर संस्था” के रूप में नहीं बनाया गया है और न ही यह किसी मौजूदा कुरआनी संस्था का प्रतिद्वंद्वी या विकल्प होगा। बल्कि इसका उद्देश्य एक वैश्विक छत्र संगठन के रूप में कार्य करना है, जो दुनिया भर की कुरआनी संस्थाओं की सहायता और मजबूती करे।
साथ ही, प्रत्येक संस्था की स्वतंत्रता और विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए, उनके बीच सहयोग, साझेदारी और अनुभवों के आदान-प्रदान के नए अवसर पैदा करना इसका प्रमुख उद्देश्य होगा।
विभिन्न देशों के प्रमुख विद्वान शामिल
इस महासंघ की संस्थापक समिति में दुनिया के विभिन्न देशों के प्रमुख उलमा, क़ारी और अकादमिक विद्वान शामिल हैं।
अहमद ईसा अल-मुअस्रावी — मिस्र: अध्यक्ष
अब्दुर्रशीद सूफ़ी — क़तर: उपाध्यक्ष
अहमद शुक्रि शाबसुग़ — जॉर्डन: महासचिव
इसके अलावा यमन के शैख़ अब्दुस्सलाम मजीदी, तुर्किये के मुहम्मद अमीन मशाली, इराक़ के ग़ानिम क़दूरी अल-हमद, अल्जीरिया के कमाल क़द्दा, पाकिस्तान के अहमद मियाँ अत-तहानवी, कोसोवो के ख़ैरुद्दीन खोजा, फ़िलिस्तीन के अब्दुर्रहमान अल-जमल सहित अनेक कुरआनी विद्वानों को इस पहल में शामिल किया गया है।
तुर्किये, इंडोनेशिया, सीरिया, मोरक्को, सेनेगल, मलेशिया, कुवैत, अमेरिका और इटली सहित कई देशों के कुरआनी विशेषज्ञ भी इस महासंघ का हिस्सा हैं।
यह पहल दुनिया भर की कुरआनी संस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ने, उनके अनुभव साझा करने और कुरआन की शिक्षा, तिलावत और शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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