ईरानी कुरान समाचार एजेंसी (IQNA)के अनुसार, साइट जानकारी ISESCO के हवाले से, इस बयान में आया है: यह आतंकवादी कार्रवाई घृणित और शर्मनाक अपराध है और इस्लाम धर्म इस तरह के कार्यों की दृढ़ता से निंदा करता है, इस आतंकवादी हमले के अपराधियों को इनके कामों की सज़ा मिलना चाहिए.
इस बयान के अन्य भाग में पढ़ा गयाः सुरा Maedeh की आयत न. 32 कहा गया है कि जो मनुष्य किसी की हत्या क़िसास या पृथ्वी पर भ्रष्टाचार के अलावह करे तो ऐसा है कि सब लोगों को मार डाला .. इस्लाम में रक्त स्राव निषिद्ध(हराम) है.
इसी तरह इस बयान के अंत में, संगठन आयसिस्को ने पूजा स्थानों पर हमले को चाहे मस्जिद हो या चर्च, घृणित कार्वाई और अमानव विरोधी जाना, और इस तरह के आपराधिक कार्यों के करने वालों को अपराधियों में गिना जाता है.
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